
Unidentified Body की पहचान में पुलिस रही नाकाम
मामला दरभंगा के अशोक पेपर मिल थाना क्षेत्र का है, जहां रेल लाइन के पास अकराहा गांव से दो अलग-अलग दिनों में शव बरामद किए गए थे। पहला शव 26 मार्च की रात को मिला, जबकि दूसरा 28 मार्च की सुबह बरामद हुआ। थाना प्रभारी के अनुसार, दोनों मृतकों की उम्र लगभग 50 वर्ष के आसपास थी और उनके पहनावे से वे हिंदू प्रतीत हो रहे थे। प्रारंभिक जांच में दोनों की मौत ट्रेन की चपेट में आने से होने की पुष्टि हुई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और पहचान के लिए 72 घंटों तक इंतजार किया।
जब निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई भी परिजन या रिश्तेदार शवों पर दावा करने नहीं आया, तो पुलिस ने इन लावारिस शव को विधिवत कबीर सेवा संस्थान को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया। हालांकि, शवों से बरामद कपड़े और अन्य सामान को पुलिस ने पहचान के लिए सुरक्षित रख लिया है।
मानवता की मिसाल है कबीर सेवा संस्थान
कबीर सेवा संस्थान एक ऐसी संस्था है जो दरभंगा प्रमंडल और समस्तीपुर रेल मंडल तक के अज्ञात और लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती है। यह संस्थान सिर्फ अंतिम संस्कार ही नहीं करता, बल्कि शव के अवशेष (अस्थियों) को भी न्यूनतम तीन महीने तक सुरक्षित रखता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अगर बाद में किसी मृतक के परिजन आ जाएं, तो वे अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अस्थियों को प्राप्त कर सकें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। तीन महीने के बाद संस्थान अपने स्तर पर इन अस्थियों को प्रवाहित कर देता है।
गौरतलब है कि कोरोना काल के दौरान एक अमेरिकी संस्था ने कबीर सेवा संस्थान को गैस से चलने वाला शवदाह संयंत्र प्रदान किया था। तब से सामान्य और सभी अज्ञात शवों की अन्त्येष्टि इसी संयंत्र से की जाती रही है, क्योंकि इस पर लागत कम आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, पिछले एक पखवाड़े से गैस की किल्लत के कारण संस्थान को पारंपरिक तरीके से लकड़ियों (गोरहा) पर शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।







