
UPSC Result: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम हर साल लाखों उम्मीदवारों के सपनों को सच करते हैं, लेकिन कई बार इन परिणामों से जुड़े विवाद और फर्जी दावे भी सामने आते हैं, जो न केवल उम्मीदवारों को, बल्कि आम जनता को भी भ्रमित करते हैं।
UPSC Result 2025: फर्जी दावों से कैसे बचें? जानें पूरी सच्चाई
UPSC Result के बाद फर्जी दावों का सिलसिला
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा 6 मार्च 2026 को सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी किया गया था। परिणाम सामने आते ही देश के विभिन्न हिस्सों से कुछ व्यक्तियों ने खुद को सफल उम्मीदवार बताते हुए दावे करने शुरू कर दिए। कई मामलों में एक जैसे नाम होने या जानकारी की सही पुष्टि न होने के कारण भारी भ्रम की स्थिति बन गई। बाद में आयोग और प्रशासनिक जांच में इन दावों की सच्चाई सामने आई और यह स्पष्ट हुआ कि कई मामले फर्जी थे।
301वीं रैंक को लेकर सामने आया दो आकांक्षा सिंह का दावा एक बड़ा रैंक विवाद बन गया। दरअसल, परिणाम जारी होने के बाद एक ही नाम की दो महिलाओं ने इस रैंक पर अपनी सफलता का दावा किया था। इनमें से एक उम्मीदवार बिहार से थीं, जबकि दूसरी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां ब्लॉक के अभईपुर गांव की निवासी थीं। दोनों के दावों के बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गरमा गया। स्थिति को स्पष्ट करने के लिए पीआईबी इंडिया की ओर से एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी की गई। प्रेस रिलीज में बताया गया कि आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक हासिल करने वाली वास्तविक उम्मीदवार गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह हैं, जिनकी माता का नाम नीलम सिंह है। इस स्पष्टीकरण के बाद लंबे समय से चला आ रहा भ्रम समाप्त हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। वहां की रहने वाली शिखा गौतम ने दावा किया कि उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में 113वीं रैंक प्राप्त की है। बताया गया कि शिखा ने फोन करके अपने परिवार को अपनी इस कथित सफलता की जानकारी दी। यह खबर सुनते ही परिवार और रिश्तेदारों में खुशी का माहौल छा गया। लोगों ने मिठाइयां बांटीं और जश्न मनाया। जब शिखा गौतम अपने घर बुलंदशहर पहुंचीं, तो स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत भी किया। हालांकि, बाद में जब आधिकारिक परिणाम की जांच की गई, तो पता चला कि 113वीं रैंक किसी अन्य उम्मीदवार को मिली है, जो हरियाणा की रहने वाली हैं। इस प्रकार, बुलंदशहर की शिखा गौतम का दावा गलत साबित हुआ और पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर भी काफी सुर्खियां बटोरीं।
बिहार के शेखपुरा जिले में भी यूपीएससी परिणाम को लेकर एक फर्जी दावा सामने आया। फतेहपुर गांव के निवासी रंजीत कुमार ने 6 मार्च को परिणाम आने के बाद खुद को ऑल इंडिया रैंक 440 का उम्मीदवार बताया। गांव के लोगों को जब इसकी जानकारी मिली, तो वहां भी खुशी का माहौल बन गया। लोगों ने उसे बधाई दी और उसकी उपलब्धि की चर्चा होने लगी। बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के उसे सम्मानित भी किया गया। यहां तक कि स्थानीय थाने के अधिकारी ने भी उसे माला पहनाकर सम्मान दिया। लेकिन बाद में जब इस दावे की जांच हुई, तो पता चला कि 440वीं रैंक बिहार के रंजीत कुमार की नहीं, बल्कि कर्नाटक के रंजीत कुमार की है। आरोपी ने नाम में मामूली अंतर का फायदा उठाकर लोगों को भ्रमित किया था। जब प्रशासन ने उससे संबंधित दस्तावेज मांगे, तो वह अचानक गायब हो गया। बताया जा रहा है कि वह दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। फिलहाल पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
79वीं रैंक पर भी गहराया भ्रम
UPSC के परिणाम के बाद एक और मामला सामने आया, जिसमें 79वीं रैंक को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी। दरअसल, राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली प्रियंका चौधरी ने सिविल सेवा परीक्षा में 79वीं रैंक हासिल की है। वहीं, उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जखनिया क्षेत्र के गौरा गांव की रहने वाली एक अन्य प्रियंका चौधरी का नाम भी सोशल मीडिया पर उसी रैंक के साथ जोड़ा जाने लगा। उनके पिता, जो एक सरकारी विभाग में ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं, ने मीडिया से बातचीत में अपनी बेटी की सफलता का जिक्र किया था। बाद में गाजीपुर की प्रियंका चौधरी ने खुद स्पष्ट किया कि उन्होंने यूपीएससी में इस रैंक का कोई दावा नहीं किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह वर्तमान में प्रयागराज में जीएसटी इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और उनका चयन वर्ष 2025 में हुआ था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वास्तविक प्रियंका चौधरी ने चौथे प्रयास में पाई सफलता। UPSC में 79वीं रैंक हासिल करने वाली वास्तविक उम्मीदवार राजस्थान के बीकानेर जिले की प्रियंका चौधरी हैं। उन्होंने कड़ी मेहनत और लगातार प्रयास के बाद अपने चौथे प्रयास में यह महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। उनके पति 2015 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में तैनात हैं। यह घटनाएँ एक बार फिर यह बताती हैं कि किसी भी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अत्यंत आवश्यक है, ताकि गलतफहमी और फर्जी दावों से बचा जा सके।

