
Vidyapati Smriti Parv Hyderabad: जिस तरह दीपक की लौ अंधेरे को चीरती है, वैसे ही अपनी संस्कृति की विरासत को सहेजने का जुनून मीलों दूर भी मैथिलों को एक सूत्र में पिरो रहा है। हैदराबाद में, यह जुनून एक भव्य पर्व के रूप में प्रकट हुआ, जहां लोक कवि कोकिल विद्यापति की अमर गाथा गूंजी।
Vidyapati Smriti Parv Hyderabad: संस्कृति की पताका, एकता का संकल्प
Vidyapati Smriti Parv Hyderabad: प्रवासी मैथिलों में उत्साह का संचार
हैदराबाद के प्रवासी मैथिलों के लिए रविवार का दिन विशेष उत्साह और सांस्कृतिक ऊर्जा से भरा रहा। लोक कवि कोकिल बाबा विद्यापति की स्मृति में आयोजित संध्या पर्व ने यहाँ रहने वाले मैथिल समुदाय को एकजुट कर दिया। मिथिला सामाजिक मंच द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह का विधिवत शुभारंभ दरभंगा के लोकप्रिय सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने किया। उनके साथ मैथिली अकादमी, बिहार के पूर्व अध्यक्ष पंडित कमलाकांत झा, पूर्व विधायक एवं तेलंगाना प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष एनवीएसएस प्रभाकर, तेलंगाना भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष डॉ. शिल्पा रेड्डी, मिधानी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. संजय कुमार झा, मिथिला सामाजिक मंच के अध्यक्ष राम विनोद झा, महासचिव रंजन कुमार झा और वरिष्ठ मैथिली सेवा अभियानी प्रवीण कुमार झा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने अपने उद्घाटन संबोधन में विद्यापति को एक विश्वव्यापी महान साहित्यकार बताया। उन्होंने कहा कि मिथिला से कोसों दूर, दण्डकारण्य क्षेत्र के हैदराबाद में, मिथिला सामाजिक मंच द्वारा उनके कृतित्व को संरक्षित और संवर्धित करने का कार्य अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार यह मंच ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कर मिथिला और मैथिली संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को जीवंत रख रहा है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। डॉ. ठाकुर ने इस बात पर भी जोर दिया कि पूरी दुनिया में कवि कोकिल बाबा विद्यापति के नाम पर हो रहे कार्यक्रम और मैथिल वासियों का मातृभूमि तथा मातृभाषा के विकास के लिए एक साथ आना, मिथिला एवं मैथिली के उज्ज्वल भविष्य का शुभ संकेत है। इस आयोजन में शामिल होना उनके लिए अत्यंत गौरवशाली क्षण था।
मिथिला का योगदान और पृथक राज्य की मांग
विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित मैथिली अकादमी, बिहार के पूर्व अध्यक्ष पंडित कमलाकांत झा ने कहा कि विद्यापति का सम्मान केवल मिथिलावासी ही नहीं, बल्कि पूरा देश और विश्व करता है। उन्होंने मिथिला के विकास में वहाँ के निवासियों के साथ-साथ प्रवासी मैथिलों के महत्वपूर्ण योगदान पर भी प्रकाश डाला। पंडित झा ने वर्तमान समय में मिथिला के सर्वांगीण विकास के लिए एक पृथक मिथिला राज्य के गठन को अपरिहार्य बताया और इसके लिए एकजुट होकर प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पूर्व विधायक और तेलंगाना भाजपा प्रदेश कमेटी के उपाध्यक्ष एनवीएसएस प्रभाकर ने हैदराबाद में मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को जगाने में मिथिला सामाजिक मंच के अहम योगदान की सराहना की। तेलंगाना भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष डॉ. शिल्पा रेड्डी और मिधानी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. संजय कुमार झा ने कहा कि दुनिया की सबसे मधुर भाषा मैथिली बोलने वाले लोगों की आपसी एकता और एकजुटता न केवल सराहनीय है, बल्कि हम सभी के लिए अनुकरणीय भी है।
सांस्कृतिक विरासत और अधिकारों की बात
अतिथियों का स्वागत करते हुए मिथिला सामाजिक मंच के अध्यक्ष राम विनोद झा ने कहा कि विद्यापति के कारण ही मिथिला भारत की सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों की संवाहक रही है, और भारत की उत्कृष्टता में मिथिला का अहम योगदान है। मंच के कार्यकारी अध्यक्ष शंभु नाथ झा ने मिथिला और मैथिली की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि मैथिली को संवैधानिक भाषा का दर्जा मिल जाने के बावजूद वह राजनीतिक उपेक्षा का शिकार है और अभी भी अपने अधिकारों से वंचित है। महासचिव रंजन कुमार झा ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि हैदराबाद के प्रवासी मैथिलों के अभूतपूर्व सहयोग के कारण ही विद्यापति स्मृति संध्या का भव्य आयोजन लगातार सातवीं बार संभव हो पा रहा है। इसके लिए सभी मैथिल भाई बधाई के पात्र हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन प्रवीण कुमार झा और धीरेन्द्र झा ‘धीरू’ ने मिलकर किया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
लोकप्रिय उद्घोषक राधेभाई के संचालन में आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में मैथिली मंच के स्थापित कलाकार माधव राय, रचना झा एवं उनके साथियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आरंभ में अतिथियों का स्वागत मिथिला की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप मिथिला पेंटिंग से सजे पाग, चादर, स्मृति प्रतीक एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया गया। कार्यक्रम में प्रवीण कुमार झा के संपादन में प्रकाशित मंच की स्मारिका ‘नव जागृति’ का लोकार्पण भी हुआ। इस आयोजन में हजारों की संख्या में दर्शक मौजूद थे, जिन्होंने मैथिली संस्कृति और विरासत के प्रति अपनी गहरी आस्था और प्रेम का प्रदर्शन किया।




