



फुलवारी शरीफ में हुए टेरर प्लान के पर्दाफाश होने के बाद देश की सर्वोच्च एजेंसी एनआईए ने इस मामले को अपने मातहत कर लिया है। वहीं, राज्य की एटीएस की टीम भी अपना होम वर्क शुरू कर चुकी है। हालांकि, इस मामले में कई महत्वपूर्ण सूचनाएं भी लीक हो रही हैं!
सूत्रों पर भरोसा करें तो एटीएस की टीम में दर्जन भर ऐसे पदाधिकारी हैं जो किसी भी सूचना को कहीं भी लीक कर देते हैं! सूत्रों का कहना है कि विभाग में करीब डेढ़ दर्जन पदाधिकारी एक ही कॉम के हैं। इसमें करीब आधा दर्जन से अधिक ऐसे पदाधिकारी हैं जिनका एटीएस में टर्म पूरा हो गया है।
लेकिन, अब तक विभाग में बने हुए हैं। इनका जो भी क्षेत्र है। उसमें कई संदिग्ध लोगों से एक तरह का रिश्ता कायम है। ऐसे लोगों से सूचना जुटाने के बदले अपनी ही सूचना शेयर कर देते हैं, जो देश के लिए घातक है। ऐसे पदाधिकारियों के मोबाइल को खंगाला जाए तो और भी पर्दा उठ सकता है! इस मामले को लेकर जब आप किसी वरीय पुलिस पदाधिकारी से पूछते है तो कुछ भी बताने से इंकार कर देते हैं!
हालांकि एटीएस कि पुलिस भी इस बात को खंगाल रही है कि भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए कहां से पैसे भेजे जा रहें हैं! फुलवारी शरीफ टेरर प्लान के बाद पापुलर फ्रंट आफ इंडिया एवं उससे जुड़े संगठनो की जांच में अब एजेंसियां लग गई है !क्यूंकि वर्ष 2047तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सामने आया था!
सूत्रों का कहना है कि मिथिलांचल में पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) के विभिन्न नामों से आधा दर्जन उप संगठन सक्रिय हैं। ये संगठन छात्रों, महिलाओं, बेरोजगार युवक, वृद्धों और कारोबारी के लिए अलग-अलग नाम से कार्य करते हैं। कोई फंडिंग जुटाने काम करता है तो कोई आइटी सेल का संचालन। पर्चा बांटने और मदरसा-मस्जिद में जागरूकता अभियान चलाने के लिए भी संगठन है। जांच में इसकी जानकारी सामने आने पर इन संगठनों की कुंडली खंगाली जा रही है।
एसडीपीआइ की सक्रियता बढ़ी है!
इसके अलावे कानूनी सहायता के लिए भी एक संगठन कार्य करता है। फंड जुटाने की जिम्मेदारी एक संगठन के पास है। सेमिनार, आंदोलन में भीड़ जुटाने, मुद्दा तय करने, आइटी सेक्टर के लिए भी अलग-अलग संगठन हैं। साथ ही राजनीतिक विंग सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया (एसडीपीआइ) की सक्रियता भी बीते विधानसभा चुनाव से लगातार बढ़ी है। किस उप संगठन से क्या काम लेना है और उसकी क्या उपलब्धि है, इसकी समीक्षा और अंतिम निर्देश मुख्य विंग पीएफआइ के कप्तान ही तय करते हैं। जिले में अब तक की जांच में यह बात सामने आई है। इसके बाद संबंधित उप संगठनों से जुड़े लोगों की खोज तेज कर दी गई है।
रेहाब फाउंडेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से फंडिंग जुटाने का काम किया जाता है। सूत्रों की मानें तो पहले केरल से फंड आता था। इसके बाद झारखंड, यूपी, बंगाल, बिहार से फंड आने लगा। स्थानीय स्तर से भी फंडिंग कर राशि संगठन को मुहैया कराई जाती है। पीएफआइ के प्रदेश महासचिव दरभंगा के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के शंकरपुर निवासी सलाउल्लाह के घर तीन दिसंबर 2020 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी से इसका खुलासा हुआ था। बता दें कि सनाउल्लाह फुलवारीशरीफ से जुड़े मामले में छह नंबर का आरोपित है।
पीएफआइ का आठ पन्नों वाला विजन डाक्यूमेंट जांच एजेंसी के हाथ लगा है। इसमें पीएफआइ अपने लक्ष्य को कैसे हासिल करेगा और इसमें कौन-कौन काम किस संगठन से कराया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी है। यही कारण है कि जांच एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार दरभंगा और मधुबनी के एक दर्जन से अधिक लोगों की कुंडली खंगाली जा रही है। इसकी सूचना संबंधित जांच एजेंसी को भी दी गई है।






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