
World Water Day: पानी जब गले से उतरकर रगों में दौड़ता है तो जीवन देता है, लेकिन जब यही पानी आंखों से उतरता है तो समझिए संकट बड़ा है। इसी बड़े होते संकट पर दरभंगा में विशेषज्ञों ने चिंता जताई और भविष्य की एक गंभीर तस्वीर पेश की। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित एक ऑनलाइन उद्घाटन सत्र में जल संरक्षण के महत्व पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. संजय कुमार चौधरी ने जल के महत्व को रेखांकित किया, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में ब्रजभूषण प्रसाद ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस विशेष अवसर पर, डॉ. अनिंद्र शर्मा ने वैश्विक स्तर पर जल के असमान वितरण और गहराते जल संकट पर आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
World Water Day पर जल संरक्षण की गूंज
कार्यक्रम में शामिल हुए वक्ताओं ने वर्तमान समय में बढ़ते जल संकट पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि कैसे पानी की कमी का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है और उन्हें मीलों दूर से पानी लाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए कई व्यावहारिक उपायों पर भी मंथन हुआ। मुख्य वक्ता ने श्री सत्य साईं बाबा का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के सूखे क्षेत्रों में निःशुल्क पेयजल उपलब्ध कराने का महान कार्य किया।
वहीं, अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. चौधरी ने जल के लगातार हो रहे अपव्यय को रोकने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी से जल संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत रूप से सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अनेक जल योजनाएँ चलाई तो जा रही हैं, लेकिन आम लोगों द्वारा जल के दुरुपयोग के कारण स्थिति और भी जटिल होती जा रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/।
छात्र-छात्राओं ने भी रखे अपने विचार
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में युवा पीढ़ी ने भी जल संरक्षण पर अपने विचार प्रस्तुत किए। छात्र वक्ताओं में प्रीति कुमारी, आराध्या कुमारी, शिल्पा कुमारी, कुमकुम कुमारी, अर्पणा, एम.डी. महफूज़ आलम तथा शिवकुमार ने अपने विचार रखे और जल बचाने के अपने-अपने तरीके सुझाए। उनका उत्साह देखकर यह स्पष्ट था कि युवा पीढ़ी इस मुद्दे को लेकर जागरूक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मंत्रोच्चार के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ वेदमंत्रों के पाठ के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और सकारात्मक बना दिया। स्वागत संबोधन डॉ. सोनू राम शंकर द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन की जिम्मेदारी डॉ. मोनी शर्मा ने निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन शोधार्थी रूपशी भारद्वाज ने किया और तकनीकी सहयोग शोधार्थी शिव व्रत कुमार द्वारा प्रदान किया गया। आयोजकों ने बताया कि इस श्रृंखला में 23 मार्च को एक लेख प्रतियोगिता, 24 मार्च को भाषण प्रतियोगिता और 25 मार्च को समापन समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग में ही किया जाएगा।





