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जनवरी, 7, 2026

फल्गु नदी पुनरुत्थान: बिपार्ड के 123 कनीय इंजीनियरों ने निरंजना नदी को फिर से जीवंत करने का बीड़ा उठाया

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फल्गु नदी पुनरुत्थान: सदियों से सूखी पड़ी फल्गु, जिसके किनारे कभी मोक्ष की कामना लिए श्रद्धालु आते थे, अब अपने पुराने गौरव को पाने की राह पर है। बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) के युवा इंजीनियरों ने इस मौन तपस्या में एक नई ऊर्जा भर दी है।

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फल्गु नदी पुनरुत्थान: बिपार्ड के 123 कनीय इंजीनियरों ने निरंजना नदी को फिर से जीवंत करने का बीड़ा उठाया

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फल्गु नदी पुनरुत्थान: गया से चतरा तक का अभियान

बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) के 123 कनीय अभियंताओं ने निरंजना-फल्गु नदी के जीर्णोद्धार अभियान को एक नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा की। इन युवा इंजीनियरों ने गया से लेकर झारखंड के चतरा जिले के हंटरगंज तक निरंजना नदी के किनारों का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य नदी के पुनरुद्धार के प्रयासों को गति प्रदान करना और जमीनी स्तर पर उसकी स्थिति का आकलन करना था।

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नदी के पुनरुत्थान का यह कार्य केवल जलधारा को फिर से प्रवाहित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यावरण और कृषि को भी नया जीवन देगा। सदियों से प्रतीक्षित इस बदलाव के लिए किया जा रहा यह प्रयास, बिहार में जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

कनीय अभियंताओं की इस पहल से स्थानीय लोगों में भी आशा की नई किरण जगी है। उन्होंने न केवल नदी के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया, बल्कि श्रमदान कर सफाई और जागरूकता अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाई। यह दिखाता है कि सामूहिक प्रयासों से किस तरह बड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।

नदी का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

निरंजना फल्गु नदी का बिहार के इतिहास और संस्कृति में गहरा महत्व है। यह नदी पितृपक्ष के दौरान पिंडदान के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रही है। हालांकि, दशकों से इसका प्रवाह मंद पड़ गया था और कई स्थानों पर यह सूख चुकी थी। अब इसके पुनर्जीवन से न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस अभियान में राज्य सरकार और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग भी मिल रहा है, ताकि निरंजना को उसका प्राचीन वैभव लौटाया जा सके। यह एक दीर्घकालिक परियोजना है, जिसके सफल क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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बिपार्ड के अभियंताओं का यह प्रयास अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जहाँ नदियाँ प्रदूषण और सूखे की समस्या से जूझ रही हैं। यह अभियान दिखाता है कि तकनीकी ज्ञान और सामुदायिक सहभागिता के संयोजन से जल संरक्षण के चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों को भी हासिल किया जा सकता है।

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