गयाजी दारोगा परीक्षा नकल: बिहार के गया में दारोगा भर्ती परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें 11 सदस्य शामिल थे। ब्लूटूथ और वॉकी-टॉकी के जरिए अभ्यर्थियों तक जवाब पहुंचाए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह के बाकी सदस्य फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
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दारोगा परीक्षा नकल: ऐसे चल रहा था हाईटेक नकल का खेल
दरअसल, 27 मई को बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा दारोगा बहाली मुख्य परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा में गया शहर के 10 परीक्षा केंद्रों पर हाईटेक तरीके से चोरी कराने वाले एक शातिर गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने रामपुर थाना क्षेत्र के शिव मंदिर के पास से गिरोह के सक्रिय सदस्य आशुतोष कुमार पासवान को गिरफ्तार किया है। वह नालंदा जिले के जीराइनपर गांव का निवासी बताया गया है। उसके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि परीक्षा केंद्र के अंदर मौजूद अभ्यर्थी मुकेश कुमार प्रश्नों को बाहर भेज रहा था। बाहर बैठे गिरोह के सदस्य इन सवालों का जवाब तैयार कर ब्लूटूथ और वॉकी-टॉकी की मदद से उसे वापस पहुंचा रहे थे। इस तकनीकी जाल के जरिए परीक्षा में अनुचित लाभ दिलाने की कोशिश की जा रही थी।
WhatsApp ग्रुप ‘XYZ’ बना था नकल का अड्डा
गिरफ्तार आशुतोष कुमार पासवान ने पूछताछ में खुलासा किया कि गिरोह ने ‘XYZ’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था, जिसमें 11 सदस्य जुड़े हुए थे। परीक्षा केंद्र से भेजे गए प्रश्न इस ग्रुप में साझा किए जाते थे। इसके बाद सॉल्वर अर्जुन कुमार सवालों को हल कर उत्तर ग्रुप में भेजता था, जिसे तकनीकी उपकरणों के जरिए अभ्यर्थी तक पहुंचाया जाता था। आशुतोष ने पुलिस को बताया कि उसकी मुलाकात परीक्षार्थी मुकेश कुमार से उसके फुफेरे साले अमन ने कराई थी। इसके बाद सभी ने मिलकर नकल कराने की पूरी योजना बनाई और परीक्षा के दिन उसे अंजाम देने का प्रयास किया।
पुलिस खंगाल रही 14 संदिग्ध नंबरों की CDR
मामले की तह तक पहुंचने के लिए रामपुर थाना पुलिस अब 14 संदिग्ध मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इन नंबरों की जांच से पूरे रैकेट के संचालन और अन्य सदस्यों की भूमिका का खुलासा होगा। पुलिस ने इस मामले में पांच अन्य आरोपियों की पहचान कर ली है, जिनमें परीक्षार्थी मुकेश कुमार, सॉल्वर अर्जुन कुमार, प्रमोद कुमार, अमन और दीपक शामिल हैं। सभी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही, परीक्षार्थी मुकेश कुमार के खिलाफ आयोग स्तर पर कार्रवाई के लिए बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग से भी संपर्क साधने की तैयारी की जा रही है।
रामपुर थानाध्यक्ष दिनेश बहादुर सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने स्वयं प्राथमिकी दर्ज कराई है। जांच की जिम्मेदारी 2019 बैच के सब-इंस्पेक्टर गुरु प्रसाद पंडित को सौंपी गई है। पुलिस का दावा है कि सीडीआर और डंप डेटा के विश्लेषण के बाद पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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पुलिस के अनुसार, गिरोह का एक सक्रिय सदस्य आशुतोष कुमार पासवान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं परीक्षा केंद्र के अंदर मौजूद अभ्यर्थी मुकेश कुमार और बाहर बैठे सॉल्वर अर्जुन कुमार समेत पांच नामजद आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश तेज कर दी गई है।
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