Bihar Vehicle Auction Scam: गोपालगंज में जब्त वाहनों की फर्जी नीलामी से जुड़े बड़े मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने निर्णायक कार्रवाई की है। इस Bihar Vehicle Auction Scam में तत्कालीन मोटरयान निरीक्षक (MVI) सुनील कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वर्तमान में गया में पदस्थापित सुनील कुमार सिंह पर चोरी की स्कॉर्पियो का भौतिक सत्यापन किए बिना ही मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करने और नीलामी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता बरतने का आरोप है।
यह गिरफ्तारी पटना उच्च न्यायालय के 4 नवंबर 2025 के आदेश के बाद दर्ज हुए एक मामले से जुड़ी है। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद आर्थिक अपराध इकाई ने 20 नवंबर 2025 को केस दर्ज कर इस पूरे प्रकरण की गहन जांच शुरू की थी। इस कार्रवाई से घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जल्द ही सामने आने की संभावना है।
कैसे हुआ स्कॉर्पियो चोरी और फर्जी नीलामी का खेल?
यह पूरा मामला रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के खरहरी गांव निवासी राधेश्याम सिंह की स्कॉर्पियो की चोरी से शुरू हुआ था। उनकी स्कॉर्पियो का मूल रजिस्ट्रेशन नंबर जेएच01सीजे-7840 था। वाहन चोरी होने के बाद राधेश्याम सिंह ने 27 दिसंबर 2019 को दिनारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इसके बाद, 19 जून 2020 को गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने 340 लीटर अवैध शराब के साथ एक स्कॉर्पियो जब्त की। इस वाहन पर बीआर06पीडी9070 नंबर की प्लेट लगी थी। सिधवलिया थाने में इस संबंध में एक अलग प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच में खुलासा हुआ कि शराब के साथ जब्त की गई स्कॉर्पियो असल में वही वाहन थी जो राधेश्याम सिंह के पास से चोरी हुई थी। आरोप है कि तस्करों ने वाहन की पहचान छिपाने के लिए उसका मूल रजिस्ट्रेशन नंबर बदल दिया था। इंजन और चेसिस नंबर के आधार पर वाहन का वास्तविक नंबर जेएच01सीजे-7840 ही था।
बिना सत्यापन मूल्यांकन रिपोर्ट और नीलामी पर सवाल
आर्थिक अपराध इकाई की जांच में सामने आया कि पुलिस और परिवहन कार्यालय के अधिकारियों ने वाहन के बदले हुए नंबर को ही सही मान लिया। इसके बाद, चोरी की स्कॉर्पियो की नीलामी कर दी गई, जिसमें वाहन के वास्तविक मालिक राधेश्याम सिंह को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं मिला।
EOU की जांच के अनुसार, तत्कालीन एमवीआई सुनील कुमार सिंह ने वाहन का भौतिक सत्यापन किए बिना ही मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर दी। रिपोर्ट में वाहन की कीमत का आकलन तो किया गया, लेकिन इंजन और चेसिस नंबर का कोई उल्लेख नहीं था। आरोप है कि इसी गलत रिपोर्ट के आधार पर बदली हुई नंबर प्लेट वाली स्कॉर्पियो की नीलामी प्रक्रिया को पूरा कर दिया गया।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां, जांच का दायरा बढ़ा
इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई पहले ही तीन अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें सिधवलिया थाना कांड के तत्कालीन अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक राजेंद्र राम शामिल हैं, जिन्हें 8 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, जिला परिवहन कार्यालय, गोपालगंज के तत्कालीन लिपिक अखिलेश लाल और डाटा इंट्री ऑपरेटर हैदर अली अंसारी को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।
अब तत्कालीन एमवीआई सुनील कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले की जांच का दायरा काफी बढ़ गया है। आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों ने बताया कि वाहन की जब्ती से लेकर उसके सत्यापन, मूल्यांकन और नीलामी तक की पूरी प्रक्रिया की गहनता से जांच की जा रही है। इस पूरे प्रकरण में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।







