



Gopalganj Bridge: जीवन रेखा पर मंडराया संकट का बादल, जहां एक पुल अपनी उम्र और बोझ से जूझ रहा है। बिहार के गोपालगंज जिले में गंडक नदी पर बना ऐतिहासिक डुमरिया घाट पुल अब गंभीर खतरे की जद में आ गया है, जो स्थानीय लोगों और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
Gopalganj Bridge: 1974 में निर्मित डुमरिया घाट पुल पर संकट के बादल क्यों?
यह पुल, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-27 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, सन 1974 में बनकर तैयार हुआ था। इसकी भार वहन क्षमता मात्र 110 टन निर्धारित की गई थी, लेकिन वर्तमान में इससे दोगुने से भी अधिक वजनी, लगभग 210 टन तक के वाहन धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। इस अत्यधिक भार के कारण पुल की संरचना पर लगातार दबाव पड़ रहा है, जिससे इसकी नींव और ऊपरी ढांचा कमजोर होता जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे पर लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। जिस तरह से पुल से अतिभारित वाहन गुजर रहे हैं, वह किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। इस गंभीर विषय पर, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए, किसी भी समय कोई गंभीर दुर्घटना घटित हो सकती है, जिससे न केवल जान-माल का नुकसान होगा, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग पर यातायात भी ठप हो जाएगा। वर्तमान स्थिति यह बताती है कि पुल पर से गुजरने वाले अतिभारित वाहन के आवागमन को तुरंत नियंत्रित करने की आवश्यकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
क्या हैं पुल की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम?
गोपालगंज जिला प्रशासन ने इस संबंध में कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य संबंधित विभागों को पत्र लिखकर पुल की सुरक्षा और मरम्मत की अपील की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार निगरानी कर रहे हैं और भारी वाहनों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं, हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पुल पर से गुजरने वाले ट्रकों और अन्य भारी वाहनों पर कोई प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुल की भार क्षमता को देखते हुए, तत्काल प्रभाव से भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए और उसकी संरचनात्मक ऑडिट कर मरम्मत का कार्य शुरू करना चाहिए। अन्यथा, यह ऐतिहासिक पुल कभी भी ढह सकता है, जिसके गंभीर परिणाम होंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह समस्या सिर्फ गोपालगंज की नहीं, बल्कि देश के कई अन्य हिस्सों में भी पुराने पुलों की सुरक्षा को लेकर उठ रही है, जहां क्षमता से अधिक भार ढोने वाले वाहनों के कारण infrastructure पर खतरा मंडरा रहा है।



