
Jamui News: गांव की चौपाल पर बैठकर चटखारे लेने वाले दिन लद गए, अब चौपाल की जगह कॉमन सर्विस सेंटर लेंगे और विकास की नई इबारत लिखेंगे। इसी कड़ी में जमुई में सहकारिता विभाग ने एक ऐसी कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) को पारंपरिक खोल से निकालकर एक नया व्यावसायिक कलेवर देना है। शहर के न्यू द्वारिका विवाह भवन में आयोजित इस एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला में जिले के पैक्स अध्यक्षों, प्रबंधकों और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने भाग लिया, जहां भविष्य के पैक्स का खाका खींचा गया।
Jamui News: जानिए क्यों कहा गया पैक्स को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी श्री नवीन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय के साथ पैक्सों को अपनी भूमिका बदलनी होगी। उन्होंने कहा, “पैक्स ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अब उन्हें केवल ऋण और खाद-बीज के पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर व्यावसायिक विविधीकरण की ओर बढ़ना होगा।” डीएम ने आगे की योजना बताते हुए कहा कि पैक्सों को कॉमन सर्विस सेंटर और डिपॉजिट मोबिलाइजेशन एजेंट के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि किसानों को जमीनी स्तर पर आधुनिक बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं मिल सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस कार्यशाला में सेवानिवृत्त संयुक्त निबंधक अजय कुमार अलंकार ने पैक्सों के प्रशासनिक और वित्तीय दायित्वों के साथ-साथ उद्यमशीलता की नई परिभाषा समझाई।
कार्यशाला में भागलपुर प्रमंडल के संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण) मुकेश कुमार और प्रभाकर कुमार ने भी प्रतिनिधियों को संबोधित किया। उन्होंने पैक्सों में पारदर्शी लेखा संधारण और समय पर अंकेक्षण की अनिवार्यता पर जोर दिया ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता से बचा जा सके। प्रशिक्षण के दौरान धान अधिप्राप्ति, मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना और बिहार राज्य फसल सहायता योजना जैसी जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की बारीकियों से भी प्रतिनिधियों को अवगत कराया गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
इन सरकारी योजनाओं पर भी हुआ मंथन
जिला सहकारिता पदाधिकारी सह सहायक निबंधक हरेंद्र प्रसाद ने पैक्सों द्वारा अपनाए जा सकने वाले नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे पैक्स अब पेट्रोल पंप संचालन, गोदाम निर्माण और नए बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की सदस्यता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में कदम रख सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य पैक्सों को आत्मनिर्भर बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने इन नई जानकारियों को उत्साह के साथ ग्रहण किया। यह कार्यशाला एक ज्ञानवर्धक वातावरण में संपन्न हुई, जहां से सभी प्रतिनिधि एक नई सोच और ऊर्जा लेकर लौटे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भविष्य में ये पैक्स न केवल किसानों के सहायक होंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ बनकर उभरेंगे।



