
Police Corruption: बिहार पुलिस की छवि पर एक बार फिर दाग लगने की ख़बर जमुई से आ रही है, जहां घूसखोरी के आरोप में एक महिला दारोगा और चौकीदार पर गाज गिरी है। एक वायरल ऑडियो ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों को निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे उजागर हुआ?
दरअसल, यह मामला जमुई के खैरा थाना कांड संख्या 85/26 से जुड़ा है। हरियाडीह निवासी पीड़ित श्यामदेव गोस्वामी ने आरोप लगाया था कि मुकदमे में उनका नाम नहीं जोड़ने के एवज में महिला दारोगा जयश्री और चौकीदार आशीष तांती ने उनसे 8 हजार रुपये की मांग की थी। पैसे न देने पर उन्हें केस में फंसाने की धमकी भी दी गई थी। पीड़ित के अनुसार, बिचौलिया अमित कुमार के माध्यम से 7500 रुपये सिक्कू कुमार के फोनपे खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इसके बाद महिला दारोगा जयश्री ने खुद फोन कर पैसे मिलने की पुष्टि भी की थी। इस पूरी बातचीत का ऑडियो क्लिप 4 अप्रैल को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसके बाद यह मामला काफी गरमा गया।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विश्वजीत दयाल ने सदर एसडीपीओ सतीश सुमन के नेतृत्व में जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस भ्रष्टाचार के इस मामले में सात दिन के भीतर यह बड़ी कार्रवाई की गई।
पुलिस भ्रष्टाचार पर हुई कार्रवाई: एसपी ने उठाया सख्त कदम
एसपी विश्वजीत दयाल ने भ्रष्टाचार के इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए मंगलवार को महिला दारोगा जयश्री और चौकीदार आशीष तांती को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। यह घटना जमुई पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है और पुलिस महकमे में पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करती है।
अधिवक्ता ने खोली पोल, अब आगे क्या?
इस मामले को लेकर अधिवक्ता सह राजद नेता गोल्डेन अंबेडकर ने भी प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने वायरल ऑडियो को एसपी और एसडीपीओ को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि खैरा थाना में गरीब और निर्दोष मजदूरों को झूठे मुकदमों में फंसाने, धमकाने और अवैध वसूली जैसी गतिविधियां हो रही हैं। गोल्डेन अंबेडकर ने दावा किया कि उन्हें भी फोन पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई थी। उन्होंने संविधान और कानून का हवाला देते हुए कहा कि अधिवक्ताओं को गरीबों के हक में आवाज उठाने का पूरा अधिकार है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। कार्रवाई के बाद उन्होंने पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस कदम से पीड़ित को न्याय मिला है। अधिवक्ता ने जमुई पुलिस से इस मामले में आगे भी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







