

Shri Krishna Singh: जमुई की सियासत का वो सूरज जिसकी रोशनी आज भी जिले के विकास की राहें रोशन करती है। बिहार के इस महान सपूत, जिन्हें अंग्रेज ‘क्रिस्टो’ के नाम से जानते थे, उनकी जयंती की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। यह कहानी है उस योद्धा की जिसने कलम और क्रांति दोनों से इतिहास लिखा।
जमुई के विकास पुरुष Shri Krishna Singh की विरासत
74 के आंदोलन की उपज और दिवंगत श्री बाबू के प्रबल अनुयायियों में से एक, प्रसिद्ध समाजसेवी राजेश कुमार सिंह बताते हैं कि इस महान स्वतंत्रता सेनानी का जन्म 21 फरवरी 1919 को खैरा प्रखंड के भौड़ गांव में हुआ था। महज 14 साल की कच्ची उम्र में ही 1933 में वे स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। उन्होंने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों से अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाकर रख दी थी, जिसके चलते वे अंग्रेजों की आंखों की किरकिरी बन गए। आलम यह था कि अंग्रेजी सरकार ने उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर पांच हजार रुपए के भारी इनाम की घोषणा कर दी थी।
उनके अदम्य साहस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक ही दिन में जमुई की 14 कचहरियों को आग के हवाले कर दिया था। इस दौरान वे 18 महीने तक जेल में भी रहे, जहां उनका संपर्क जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और आचार्य नरेंद्र देव जैसे महान देशभक्तों से हुआ। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपना खुद का दस्ता तैयार किया और ब्रिटिश ट्रेनों को तबाह करने, सरकारी दफ्तरों को उड़ाने और बेरहम अफसरों को सबक सिखाने जैसे कई साहसिक कारनामों को अंजाम दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अंग्रेजी अफसर उन्हें ‘क्रिस्टो’ कहकर बुलाते थे और बाद में वे इसी नाम से विख्यात हो गए।
आजादी के बाद उन्होंने जमुई के विकास में खुद को समर्पित कर दिया। वे 1962 में झाझा विधानसभा से पहली बार विधायक बने और फिर 1967 और 1969 में भी जीत दर्ज की। इस दौरान उन्होंने बिहार सरकार में परिवहन मंत्री, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री और पशुपालन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया। क्यूल डैम का निर्माण और जिले की सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। 1971 में वे ऊर्जा मंत्री बने और पूरे जिले की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ किया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। बाद में 1977 में वे मुंगेर से सांसद चुने गए और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही है नई पीढ़ी
श्रीकृष्ण सिंह के बाद उनके पुत्र दिवंगत नरेंद्र सिंह ने उनकी राजनीतिक विरासत को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया। वर्तमान में, उनके पौत्र अजय प्रताप सिंह और सुमित कुमार सिंह इस विरासत को संभाल रहे हैं। अजय प्रताप सिंह जमुई से विधायक रहकर जिले के विकास को गति दे चुके हैं, वहीं सुमित कुमार सिंह भी बिहार सरकार में मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं। आज दोनों भाई अपने दादा के सपनों का जमुई बनाने के लिए पूरे जोश और जुनून के साथ प्रयत्नशील हैं।
राजकीय सम्मान के साथ मनाई जाएगी जयंती
समाजसेवी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि बिहार सरकार ने 20 फरवरी 2009 को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए हर साल 21 फरवरी को जिला स्तर पर राजकीय सम्मान के साथ उनकी जयंती मनाने का निर्णय लिया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी परंपरा के तहत, हर वर्ष श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम में स्थित उनकी प्रतिमा पर जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस वर्ष भी उनकी जयंती को भव्य रूप से मनाने की सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।


