

Katihar Fire: आग की लपटें जब उठती हैं, तो सिर्फ सामान नहीं, सपने भी खाक होते हैं। कटिहार के कुरसेला हाट में 15 फरवरी को लगी भीषण आग ने सैकड़ों परिवारों की आजीविका छीन ली और उनके भविष्य पर गहरा संकट ला दिया है।
Katihar Fire: कुरसेला हाट में तबाही का मंजर
कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड स्थित हाट बाजार में 15 फरवरी की मनहूस शाम को जो हुआ, वह किसी त्रासदी से कम नहीं। देखते ही देखते आग की ऊंची लपटों ने समूचे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयावह अग्निकांड में लगभग 200 छोटी-बड़ी दुकानें जलकर पूरी तरह राख हो गईं। लकड़ी के ढांचों में बनी इन दुकानों में रखा सारा सामान, पूंजी और व्यापारियों की जमापूंजी पल भर में खाक हो गई। अनुमान के मुताबिक, छोटे-बड़े व्यापारियों को करोड़ों रुपये का Shopkeepers Loss हुआ है। यह आग की घटना सिर्फ दुकानों का जलना नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की उम्मीदों का जलना भी है।
हाट बाजार इन स्थानीय व्यापारियों के लिए केवल व्यापार का केंद्र नहीं था, बल्कि उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया भी था। पान की गुमटी से लेकर कपड़े की दुकान तक, हर व्यवसाय यहां पर फलता-फूलता था। इस घटना के बाद उन सभी दुकानदारों के सामने अब एक विकट चुनौती खड़ी हो गई है कि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करें। कई ऐसे दुकानदार हैं जिन्होंने बैंक या साहूकारों से कर्ज लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया था, अब वे कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन दल मौके पर पहुंचा, लेकिन आग की भीषणता इतनी अधिक थी कि इसे बुझाने में कई घंटे लग गए। अब राहत और पुनर्वास को लेकर गंभीर चिंतन मंथन चल रहा है। प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता और उनके व्यापार को फिर से खड़ा करने में मदद की दरकार है। स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी पीड़ितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सरकारी मदद और पुनर्वास की चुनौती
इस भीषण अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रभावित दुकानदारों को सरकारी सहायता और मुआवजे के तौर पर क्या मिल सकता है, इस पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद की उम्मीद जताई जा रही है। यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए कि इन गरीब और मध्यम वर्ग के व्यापारियों को जल्द से जल्द अपने पैरों पर खड़ा किया जा सके। उन्हें न केवल आर्थिक सहायता, बल्कि नए सिरे से व्यवसाय स्थापित करने के लिए भी मार्गदर्शन और समर्थन की आवश्यकता है। यह स्थिति वास्तव में एक बड़ी मानवीय चुनौती है। इस Shopkeepers Loss की भरपाई के लिए दीर्घकालिक योजनाओं की आवश्यकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
स्थानीय समुदाय भी इस मुश्किल घड़ी में एकजुट होकर खड़ा है। कई स्वयंसेवी संगठन और व्यक्तिगत स्तर पर लोग पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। अनाज, कपड़े और अस्थायी आश्रय जैसी बुनियादी जरूरतें मुहैया कराई जा रही हैं। यह सामुदायिक एकजुटता ही ऐसी आपदाओं से उबरने की शक्ति देती है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि राहत सामग्री और आर्थिक सहायता सही हाथों तक पहुंचे, ताकि कोई भी प्रभावित परिवार छूट न जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


