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मार्च, 11, 2026
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Kishanganj News: जीविका दीदियों ने चायपत्ती से लिखी सफलता की कहानी, अब ‘महानंदा’ ब्रांड से मिलेगी नई पहचान

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Kishanganj News: किशनगंज की हवाओं में फैली चाय की महक अब सिर्फ ताजगी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की कहानी भी बयां कर रही है। यहां की जीविका दीदियों ने चाय की पत्तियों को अपनी मेहनत से ऐसा संवारा है कि अब वे सिर्फ बागानों में काम करने वाली श्रमिक नहीं, बल्कि एक ब्रांड की मालकिन बन गई हैं।

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सोमवार, 11 मार्च 2026 को जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री हिमांशु शर्मा और अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने जिले के पोठिया प्रखंड स्थित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य इस सीजन में ‘महानंदा लीफ’ चायपत्ती के उत्पादन की कार्य योजना की समीक्षा करना और उसे बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाना था।

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Kishanganj News: आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल है यह प्रोसेसिंग यूनिट

निरीक्षण के दौरान, श्री हिमांशु शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा संचालित यह टी प्रोसेसिंग इकाई जीविका दीदियों की कड़ी मेहनत और आत्मनिर्भरता का एक जीता-जागता उदाहरण है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह इकाई सही मायनों में महिला सशक्तिकरण को जमीन पर उतार रही है। कल तक जो दीदियां सिर्फ चाय की पत्तियां तोड़ने का काम करती थीं, आज वे खुद उसी पत्ती से ‘महानंदा’ ब्रांड की चाय बना रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह बदलाव न केवल इन महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है, बल्कि उन्हें एक नई पहचान भी दे रहा है। स्थानीय उत्पाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की यह एक शानदार कोशिश है, जिससे पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।

अधिकारियों ने की कार्य योजना की समीक्षा

अधिकारियों ने प्रोसेसिंग यूनिट में चल रहे कार्यों का जायजा लिया और आगामी उत्पादन सीजन के लिए निर्धारित लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने और पैकेजिंग को और आकर्षक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उनका कहना था कि उत्पाद की गुणवत्ता ही उसकी सबसे बड़ी पहचान होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पहल से स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

यह इकाई उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं। इस योजना से जुड़कर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं, बल्कि उनका सामाजिक कद भी बढ़ रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस तरह की पहल से ही बिहार आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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