

Madhubani News: जब इतिहास की गूंज और वर्तमान का उत्साह एक साथ मिलते हैं, तो नजारा देखने लायक होता है। कुछ ऐसा ही मधुबनी के बिस्फी प्रखंड स्थित जगवन गांव में देखने को मिला, जहां सोमवार को 15वां याज्ञवल्क्य महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरा आश्रम परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और महर्षि के जयकारों से गूंज उठा।
महोत्सव का शुभारंभ कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों द्वारा महर्षि याज्ञवल्क्य की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात, राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य एवं पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचोल, संस्कृत अकादमी के पूर्व निदेशक हृदय नारायण झा, और कला, संस्कृति एवं खेल मंत्री नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
Madhubani News: जानिए कौन थे महर्षि याज्ञवल्क्य और क्या है उनका मिथिला से संबंध
कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचोल ने महर्षि याज्ञवल्क्य के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “महर्षि याज्ञवल्क्य परम ज्ञानी, महान दार्शनिक और योग विद्या के प्रकांड विद्वान थे। भले ही उनका जन्म गुजरात में हुआ, लेकिन राजा जनक के आमंत्रण पर उन्होंने अपनी जन्मभूमि त्याग दी और जनकपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया।” उन्होंने आगे बताया कि कैसे महर्षि ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा और विद्वता के बल पर शास्त्रार्थ में सभी ज्ञानियों को पराजित कर स्वर्ण-जड़ित एक हजार गायों को जीता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहीं जगवन गांव में उन्होंने गुरुकुल की स्थापना की और दुनिया को धर्म, दर्शन और ज्ञान की शिक्षा दी।

बचोल ने इस बात पर भी जोर दिया कि सनातन धर्म ही संपूर्ण विश्व में मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। यह महोत्सव उसी सनातन संस्कृति का एक प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पौराणिक स्थल के समग्र विकास के लिए युवाओं को आगे आने की जरूरत है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
विकास की बयार से बदलेगी आश्रम की सूरत
पूर्व विधायक ने आश्रम के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व को देखते हुए पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री को इसके विकास के लिए अवगत कराया गया है। इसी कड़ी में, एसएच-75 से महर्षि याज्ञवल्क्य आश्रम तक पहुंचने के लिए 69 लाख रुपये की लागत से एक पक्की सड़क का निर्माण कराया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को यहां आने में सुविधा हो।
कार्यक्रम में मौजूद खेल पदाधिकारी ने कहा कि मिथिलांचल की भूमि ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों से भरी पड़ी है। पर्यटन की दृष्टि से इन स्थलों का विकास अत्यंत आवश्यक है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। समारोह को हृदयेश कुमार झा, प्रो. विघ्नेश मिश्र, कर्नाटक से आए नरसिम्हा मूर्ति नायक, प्रेमचंद झा और शिवशंकर राय ने भी संबोधित किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन स्थानीय विजय लाल यादव ने किया। इस अवसर पर एक कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।


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