
मुख्य बातें
मैथिली साहित्य, कला व रंगमंच को समर्पित अर्घ महोत्सव का दूसरा दिन
परिचर्चा सत्र, काव्य गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ आयोजन
पंडौल, मधुबनी देशज टाइम्स। मैथिली साहित्य, कला व रंगमंच को समर्पित कार्यक्रम अर्घ के दूसरे दिन पंडौल के सरिसब पाहि में पहले सत्र की शुरुआत ज्योति झा के एकल नाटक “ललका पाग” के प्रस्तुतिकरण के साथ हुआ।
ततपश्चात वंदना उपध्याय ने कठपुतली नाटक की प्रस्तुति दी। परिचर्चा सत्र के अंतर्गत प्रेमलता मिश्र ने मैथिली रंगमंच के इतिहास, शैलैन्द्र आनंद ने मैथिली में ऐतिहासिक नाटक की आवश्यकता, डॉ.कृष्णकांत झा ने संस्कृत नाट्य साहित्य के प्रभाव, ज्योति झा ने मैथिली रंगमंच में स्त्री की भूमिका और डॉ.वंदना उपध्याय ने एकांकी एवं अन्य नाट्य विधा का मातृभाषा शिक्षण के लिए प्रयोग पर अपना मत रखा।
वहीं, सागर सिंह की ओर से प्रयोगवादी मंच पर मैथिली नाटक के भविष्य पर अपना विचार प्रस्तुत किया। दूसरे सत्र में अशोक कुमार झा अविचल की अध्यक्षता में दर्जन भर कवि एवं कवयित्रियों ने अपना-अपना कविता का पाठ किया।सायंकालीन सत्र में स्थानीय कालेज की छात्राओं की ओर से भगवती गीत प्रस्तुत किया गया।
मैथिली लोकगीत, लगनी, चैतावर आदि का सुंदर गायन कर जूही मिश्र ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सागर सिंह की अध्यक्षता में दरभंगा समूह की ओर से “निन्नक उत्तरार्ध आ स्वप्नक पूर्वार्ध ” पर शानदार प्रस्तुतिकरण दिया गया।
कार्यक्रम का समापन ‘द स्पाटलाइट थियेटर’ के प्रस्तुति लोकनृत्य झिझिया से हुआ। कार्यक्रम की सफलता को लेकर अयाची नगर युवा संगठन के विक्की मंडल अपने पूरी टीम के साथ सक्रिय दिखे।







