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Madhubani News|Jhanjharpur News| Andhrathadi News| बकरीद से एक दिन पहले…संपूर्ण विश्व के अक़ीदत-मंदों की जुटती इबादत…,कौम की दीवारें टूटती हैं… अलपुरा…तेरे सजदे में सर झुकता है…

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Madhubani News|Jhanjharpur News| Andhrathadi News| बकरीद से एक दिन पहले…संपूर्ण विश्व के अक़ीदत-मंदों की जुटती इबादत…,कौम की दीवारें टूटती हैं…अलपुरा…तेरे सजदे में सर झुकता है…। जहां, अपार जनसमूह। पीर बाबा मकदूम शाह के आशीष से लबरेज। मुगल बादशाह काल की हकीकत को जीवंत रखते मधुबनी समेत संपूर्ण मिथिलांचल, बिहार, देश ही नहीं पूरे विश्व से जुटे अकीदतमंदों का जुटान स्पष्ट है, यहां आने वालों की झोली कभी खाली नहीं रहती। जहां, बाबा मकदूम के सामने दुआ मांगते हाथ और मुख पर यही गान… भर दो झोली मेरी या मुहम्मद लौट कर तेरे दर से न जाऊंगा खाली…।

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Madhubani News|Jhanjharpur News| Andhrathadi News|अलपुरा गांव का पीर बाबा मकदूम शाह मजार…जिसने शीश नवाया…पूरी हो गई हर मुराद

झंझारपुर अनुमंडल के अंधराठाढ़ी प्रखंड के अलपुरा गांव स्थित पीर बाबा मकदूम शाह के मजार पर लगने वाला प्रसिद्ध उर्स मेला रविवार को संपन्न हो गया। यह उर्स मेला प्रखंड के प्रचीनत्तम मेलों में से एक है और प्रेत बाधा मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। मेला बकरीद पर्व से एक दिन पहले लगता है।मान्यता है कि पीर बाबा मकदूम शाह के मजार से आज तक कोई खाली हाथ नही लौटा है। जो भी यहां आकर अपनी झोली फैलाता है, पीर बाबा उसकी मुराद जरूर पूरी करते हैं। हिंदू और मुस्लिम का यहां कोई भेदभाव नही रहता।

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Madhubani News| Jhanjharpur News| Andhrathadi News| हर साल कहां से बढ़ रहे फरियादी, ताकत है दिव्य शक्ति की

प्रत्येक वर्ष फरियादियों की संख्या बढ़ती जा रही है। बहुत बड़ी संख्या में फरियादी और मन्नत चढ़ाने वाले बाबा के मजार पर जुटते हैं। मुंबई, बंगाल, नेपाल ,दिल्ली, बेंगलुरु, उड़ीसा, नेपाल, भूटान, कई देशों समेत सुदुरवर्ती क्षेत्रों से भी श्रद्धालु और फरियादी यहां जुटते हैं। प्रेतबाधा से ग्रस्त पीड़ितों की मुक्ति को लेकर दूर-दूर से लोग इस मजार पर आते हैं।

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Madhubani News| Jhanjharpur News| Andhrathadi News| उर्स की जमीन अतिक्रमण की शिकार

मुक्ति पाए लोग भी अपनी मनौती चढ़ाने यहां आते हैं। मनौती चढ़ाने वाले लोग यहां बकरे और मुर्गे की कुर्बानी देते हैं। और यहीं पका कर उसका प्रसाद ग्रहण करते हैं। किवदंति है कि पीर मकदूम शाह अपने जमाने के प्रसिद्ध और ख्याति प्राप्त फकीर थे। यहां के उर्स मेले के लिये जमीन मुगल बादशाह ने दी थी। कालांतर में उर्स की जमीन अतिक्रमण का शिकार होकर मजार वाले भूखंड के कुछ ही कट्ठों में सिमट कर रह गयी है।

Madhubani News| Jhanjharpur News| Andhrathadi News| मुगलकाल से शुरू यह उर्स बकरीद से एक दिन पहले लगता, शाम होते-होते खत्म हो जाता है

मुगलकाल से शुरू यह उर्स मेला बकरीद से एक दिन पहले लगता और शाम होते होते ये खत्म हो जाता है। इस मेले में श्रद्धालु एक रात पहले ही यहां जमा होने लगते हैं।मजार के सरपरस्त महबूब रजा कमाली और मेला इंतजामिया कमेटी के सदस्यों ने बताया कि विधि व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन और मेला कमेटी के लोग सतर्क और तैनात थे किंतु फरियादी और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिये सराय, बिजली, पानी आदि की कमी खली थी।

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