

मधुबनी से दरभंगा, मोतिहारी समेत मुजफ्फरपुर अभी लाइमलाइट में हैं जहां तेंदुआ व हिरण (चितल) की खाल की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
Wildlife Smuggling: जंगल के शांत साम्राज्य में जब लोभ की आग भड़कती है, तो वन्यजीवों का अस्तित्व दांव पर लग जाता है। खाल और नाखूनों का यह खूनी कारोबार बिहार के शांत इलाकों तक भी अपनी जड़ें फैला चुका है, जहां एक कबूलनामे ने इस नेक्सस की कई परतों को खोल दिया है।
Wildlife Smuggling: बिहार में वन्यजीव तस्करी का बढ़ता नेटवर्क
वन्यजीवों के खाल और उनके अंगों की तस्करी का सिंडिकेट एक विशाल मकड़जाल की तरह फैल चुका है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मधुबनी, झंझारपुर और दरभंगा जैसे वो शहर, जिनका सीधे तौर पर बड़े वन्यजीव अभयारण्यों से कोई सरोकार नहीं है, वहां भी अब दुर्लभ खालें मिल रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
लेकिन अब खाल के साथ-साथ बाघ के नाखून भी इस अवैध वन्यजीव व्यापार की चर्चा और तहकीकात का केंद्र बन गए हैं। इस पूरे मामले में चंपारण के चंदन के कबूलनामे ने जांच एजेंसियों को एक नई दिशा दी है।
चंदन ने अपने बयान में बताया है कि धीरज श्रीवास्तव ने उसे बाघ के नाखून के बारे में जानकारी दी थी। धीरज ने उसे नाखून की तस्वीरें भी भेजी थीं, जिसे बाद में चंदन ने ‘कॉप्स पब्लिक सर्वेंट’ को मोबाइल पर फॉरवर्ड किया था। यह खुलासा वन्यजीव अपराधों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।
हालांकि, बाघ के नाखून की इस संभावित डील का क्या हुआ, इसका पूरा ब्यौरा अभी कबूलनामे में सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं ताकि इस सिंडिकेट के सभी सदस्यों को बेनकाब किया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
मधुबनी से चंपारण तक फैला जाल: क्या कहते हैं साक्ष्य?
यह मामला दर्शाता है कि अवैध वन्यजीव व्यापार किस तरह से छोटे शहरों तक अपनी पैठ बना चुका है। तस्करी के इन मामलों में अक्सर स्थानीय लोग भी अनजाने या जानबूझकर शामिल हो जाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जांच के दायरे में कई और नाम भी सामने आ सकते हैं, जिससे इस काले कारोबार का पूरा नेटवर्क ध्वस्त किया जा सके। मधुबनी के झंझारपुर में जब्त हुई हिरण और तेंदुए की खाल के सौदे के 2.2 करोड़ रुपये मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर में तस्कर सुधाकर कुमार को पहुंचाना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जबकि 1.5 करोड़ रुपये मोतिहारी में आभूषण के एक बड़े शो-रूम के मैनेजर प्रणव कुमार को दिया जाना था। यह खुलासा झंझारपुर में खाल के साथ गिरफ्तार हुए तस्करों से पूछताछ में हुआ है। वन विभाग की टीम इसके सत्यापन में लगी है।
तेंदुआ और हिरण की खाल की तस्करी का बड़ा नेटवर्क
तस्करी में मुजफ्फरपुर के राहुल नगर निवासी धीरज कुमार को झंझारपुर में खाल के साथ गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर के सुधाकर और तपन का संबंध बाघ के नाखून, तेंदुए व हिरण की खाल तस्करी के नेटवर्क से जुड़ रहा है। वन अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में झंझारपुर में जब्त खाल पलामू टाइगर रिजर्व पार्क के संरक्षित वन्यजीवों से संबंधित होने की आशंका है। इसमें कई बड़े और संगठित तस्कर गिरोह की संलिप्तता सामने आ रही है। नए खुलासे और करोड़ों की डील की संभावना से जांच अधिकारी सकते में हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों एवं कोलकाता की विशेष टीम के संयुक्त समन्वय से की गई।
करोड़ों के सौदे का खुलासा, तस्करों के कबूलनामे से चौंकाने वाले तथ्य
झंझारपुर के रेंजर अर्जुन कुमार गुप्ता ने बताया कि पलामू क्षेत्र के शूटर और तस्करों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर लंबे समय तक निगरानी के बाद झंझारपुर में जाल बिछाया गया। इसकी मॉनिटरिंग गोपनीय तरीके से केंद्रीय टीम कर रही थी।
मोबाइल पर मंगाई खाल व बाघ के नाखून
आरोपितों के कबूलनामे के मुताबिक पहले मोबाइल के माध्यम से खाल की तस्वीरों का आदान-प्रदान हुआ। इसके बाद कीमत तय कर डील के लिए तस्कर झंझारपुर में जुटे। राहुल नगर के गिरफ्तार तस्कर धरज कुमार ने कबूलनामे में कहा है कि अजय झा से खाल के बारे में मोबाइल पर बात हुई थी। उसने हिरण और तेंदुए के खाल की तस्वीर फोन पर भेजी। जिसे मुजफ्फरपुर के तपन को भेजकर सौदा तय कराया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पूर्वी चंपारण के चंदन ने कबूलनामे में कहा है कि धीरज श्रीवास्तव ने उसे बाघ के नाखून के बारे में बताया। उसकी तस्वीर भेजी तो उसे ‘कॉप्स पब्लिक सर्वेंट’ को मोबाइल पर भेजा। हालांकि, बाघ के नाखून की डील का क्या हुआ, इसका पूरा खुलासा कबूलनामे में नहीं किया गया है।
तेंदुआ की खाल की तस्करी: 2.2 करोड़ का सौदा, मुजफ्फरपुर में नेटवर्क सक्रिय
मुजफ्फरपुर के तीन समेत पांच बड़े तस्कर रडार पर हैं। गिरफ्तार तस्कर पूर्वी चंपारण के फेनहरा थाना के कुम्हरार निवासी चंदन सिंह, ब्रह्मपुरा राहुल नगर के धीरज कुमार, मधुबनी के लखनौर थाना के रहिका निवासी अजय कुमार झा व दक्षिण बेहट निवासी पंकज कुमार झा ने कबूलनामे में माड़ीपुर के सुधाकर व तपन के अलावा धीरज श्रीवास्तव, राकेश उर्फ गुड्डू भैया व संदीप बॉस को सिंडिकेट में पर्दे के पीछे से डील कराने वाला मास्टरमाइंड बताया है। इन सबको जांच के रडार पर रखा है। अधिकारियों के मुताबिक जांच शुरुआती चरण में है। आगे और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
पलामू टाइगर रिजर्व से जुड़े तार, केंद्रीय एजेंसियों की भी भूमिका
गिरफ्तार हुए चारों तस्कर सिंडिकेट में प्यादे के तौर पर काम करने वाले हैं। इन्हें 30 हजार से पांच लाख रुपये तक कमीशन मिलनी थी। ऐसे मामलों में कई स्तरों पर अपराधी जुड़े होते हैं। जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर धरे गए आरोपितों को रिमांड पर लेकर फिर पूछताछ की जा सकती है।
-भास्कर भारती, डीएफओ झंझारपुर।
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