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फ़रवरी, 19, 2026
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मधुबनी में बाल श्रमिकों को बचाने के लिए बड़ा अभियान, 3 बच्चे मुक्त, मालिकों पर केस दर्ज

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मधुबनी न्यूज़: जिले में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा के निर्देश पर श्रम संसाधन विभाग ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है, जिससे कई प्रतिष्ठानों में हड़कंप मच गया। इस विशेष अभियान के तहत तीन मासूमों को बाल मजदूरी के दलदल से बाहर निकाला गया है, जबकि दोषी मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह सिर्फ शुरुआत है, क्योंकि ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

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जिलाधिकारी आनंद शर्मा के स्पष्ट निर्देशों के बाद, श्रम अधीक्षक दिनेश कुमार के नेतृत्व में मधुबनी जिले के सभी अनुमंडल क्षेत्रों में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत एक गहन धावा-दल अभियान चलाया गया। इस विशेष टीम का मकसद बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें मुक्ति दिलाना था। इसी क्रम में, जयनगर क्षेत्र से 03 बाल श्रमिकों को सफलतापूर्वक विमुक्त कराया गया।

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श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, जयनगर, अश्विनी राज ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान खान सर्विस स्टेशन से एक, दानिश वेल्डिंग वर्कशॉप से एक और वॉशिंग एंड टायर सेंटर से एक बाल श्रमिक को कार्य करते हुए पाया गया और उन्हें तुरंत मुक्त कराया गया। विमुक्त किए गए इन बच्चों को तत्काल बाल कल्याण समिति, मधुबनी के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, ताकि उनके पुनर्वास और भविष्य की योजनाएं बनाई जा सकें।

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नियोजकों पर दर्ज होगा केस और लगेगा जुर्माना

प्रशासन ने बाल श्रम में संलिप्त नियोजकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। विमुक्त बाल श्रमिकों के नियोजकों के विरुद्ध संबंधित थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की कार्रवाई तेजी से की जा रही है। इसके साथ ही, प्रत्येक बाल श्रमिक के लिए 20,000 रुपये की दर से जुर्माना जिला बाल श्रमिक पुनर्वास कल्याण कोष में जमा कराने हेतु आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अश्विनी राज ने अधिनियम के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम की धारा 3 और 3ए के उल्लंघन पर नियोजकों से 20,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का जुर्माना वसूला जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नियोजकों द्वारा बाल श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किया गया है, तो संबंधित न्यायालय में 10 गुना मुआवजे के साथ दावा पत्र दायर किया जाएगा। बाल श्रमिकों से किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान में कार्य कराना इस अधिनियम के अंतर्गत पूरी तरह से गैर-कानूनी है, और ऐसा कराने वाले व्यक्तियों को 20,000 रुपये तक का जुर्माना और दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।

जारी रहेगा बाल श्रम मुक्ति अभियान

वित्तीय वर्ष 2025-26 में मधुबनी जिले में अब तक कुल 23 बाल श्रमिकों को विभिन्न नियोजनों से विमुक्त कराया जा चुका है। इन सभी बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें और शिक्षा प्राप्त कर सकें। श्रम विभाग ने यह साफ कर दिया है कि बाल श्रमिकों की विमुक्ति हेतु धावा दल का संचालन भविष्य में भी बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा।

आज के इस महत्वपूर्ण धावा दल की टीम में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी जयनगर से अश्विनी कुमार, रहिका से गोविंद कुमार, खजौली से हितेश कुमार भार्गव, पंडौल से अभिषेक कुमार, हरलाखी से सिद्धार्थ कुमार और सर्वो प्रयास संस्था के प्रतिनिधि रत्न कुमारी शामिल थे। इस संयुक्त अभियान ने बाल श्रम के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है।

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