
Engineer Corruption: कभी अपनी जेब में फूटी कौड़ी न रखने वाले एक इंजीनियर साहब की काली कमाई का कुबेर अब राज़ उगल रहा है। मधुबनी में पदस्थापित एक विद्युत कार्यपालक अभियंता की संपत्ति देखकर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) भी हैरत में है। उनकी रियल एस्टेट में लगे अकूत निवेश ने कई सवालों को जन्म दिया है, जिनकी परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं।
Engineer Corruption: कैसे बनी करोड़ों की संपत्ति?
Engineer Corruption: कभी अपनी जेब में फूटी कौड़ी न रखने वाले एक इंजीनियर साहब की काली कमाई का कुबेर अब राज़ उगल रहा है। मधुबनी में पदस्थापित एक विद्युत कार्यपालक अभियंता की संपत्ति देखकर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) भी हैरत में है। उनकी रियल एस्टेट में लगे अकूत निवेश ने कई सवालों को जन्म दिया है, जिनकी परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मधुबनी के जयनगर में तैनात विद्युत कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक ने अपने सेवाकाल के दौरान रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच में उनकी इस अघोषित आय से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश के कई पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इन प्रमाणों की गहन छानबीन अभी भी जारी है, जिससे उनकी अवैध संपत्ति का पूरा ब्यौरा सामने आ सके।
जांच अधिकारियों के अनुसार, मनोज कुमार रजक ने वर्ष 2009 में ऊर्जा विभाग में सहायक अभियंता के पद पर अपनी सेवाएं शुरू की थीं। पिछले 17 वर्षों में उनकी अधिकांश पोस्टिंग सीमांचल के विभिन्न जिलों जैसे अररिया, कटिहार, दरभंगा और मधुबनी में ही रही है। इन्हीं जिलों में रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे कई महत्वपूर्ण भूखंड खरीदे और व्यावसायिक उद्देश्य से गोदामों का भी निर्माण कराया है।
अररिया से दरभंगा तक फैले काले कारोबार की जड़ें
ईओयू ने खुलासा किया है कि अररिया में अपनी तैनाती के दौरान मनोज कुमार रजक ने दो आवासीय भूखंडों की खरीद की थी। वहीं, दरभंगा में पदस्थापित रहने के दौरान उन्होंने सदर थाना क्षेत्र के भेलुचक मोहल्ले में एक बड़ा भूखंड खरीदकर उस पर दो मंजिला आलीशान भवन बनवाया। इस भव्य भवन का गृह प्रवेश कुछ ही महीने पहले किया गया है। इतना ही नहीं, दरभंगा शहर में दो अन्य भूखंड भी उनके द्वारा ख़रीदे गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सुपौल जिले के करजाईन थाना क्षेत्र स्थित अपने पैतृक गांव में उन्होंने एचपी गैस की डिस्ट्रीब्यूटरशिप भी ली है। इस एजेंसी के लिए उन्होंने बाजार में एक भूखंड खरीदा, उसकी घेराबंदी कराई और उस पर गोदाम व कार्यालय का निर्माण कराया। इसके ठीक पास ही उन्होंने एक और आवासीय प्लॉट लेकर मकान का भी निर्माण करवाया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि सरकारी सेवा में आने से पहले कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। यहाँ तक कि अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए लिए गए 85 हजार रुपये के ऋण का भुगतान भी उन्होंने सरकारी सेवा में आने के बाद ही किया था। एफआईआर में उनके विरुद्ध वैध आय से 1.20 करोड़ रुपये अधिक की परिसंपत्तियां अर्जित करने की जानकारी दी गई थी, लेकिन छानबीन पूरी होने के बाद यह आंकड़ा कई गुना बढ़ने की संभावना है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
नेपाल कनेक्शन और विदेशी फंडिंग की आशंका
एक सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद कार्यपालक अभियंता के नेपाल में कथित निवेश को देखते हुए उनके विरुद्ध दर्ज मामले में जांच का दायरा अब और बढ़ सकता है। ईओयू ने इस पूरे मामले में विदेशी फंडिंग के एंगल से भी जांच की संभावना जताई है। सरकारी सेवक के तौर पर बिना अनुमति विदेश यात्रा करना और वहां रिश्तेदारी या संपत्ति बनाना एक संवेदनशील मामला है, जिसकी गहनता से जांच की जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

