

Madhubani Airport: मधुबनी में हवाई अड्डे की आवश्यकता पर विराम लगाते हुए, प्रशासन ने अब हेलीपोर्ट के निर्माण का निर्णय लिया है, जो इस क्षेत्र के लिए नियमित हेलीकॉप्टर सेवाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा।
बड़ा फैसला: मधुबनी एयरपोर्ट की बजाय अब बनेगा हेलीपोर्ट, DM ने दी जानकारी, जानें पूरा प्लान
मधुबनी एयरपोर्ट की जगह अब हेलीपोर्ट और नई उम्मीदें
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हाल ही में मधुबनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान हुई समीक्षा बैठक में इस महत्वपूर्ण निर्णय पर मुहर लगी है। प्रगति यात्रा के दौरान घोषित योजनाओं की कार्य प्रगति और वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें मधुबनी में हवाई अड्डे की आवश्यकता पर गहराई से चर्चा हुई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि वर्तमान में मधुबनी में एक पूर्ण विकसित हवाई अड्डे की आवश्यकता नहीं है। दरभंगा एयरपोर्ट पर टर्मिनल निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, और रिंग रोड के निर्माण से मधुबनी की दरभंगा एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी, जिससे आवागमन और भी सुलभ हो जाएगा। रिंग रोड निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कार्य आवंटित भी कर दिया गया है। यह रिंग रोड राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
डीएम ने बताया कि मधुबनी हेलीपोर्ट के निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी, जिसमें सबसे पहले चाहरदीवारी का निर्माण कार्य किया जाएगा। यह हेलीपोर्ट जिले में नियमित हेलीकॉप्टर सेवाओं को सुनिश्चित करेगा।
जिले में औद्योगिक विकास मधुबनी को गति देने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। लौकही प्रखंड के बनगामा के निकट लगभग 450 एकड़ और झंझारपुर प्रखंड के लोहना में लगभग 250 एकड़ जमीन पर औद्योगिक केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भूमि अधिग्रहण नियम के तहत, भू-स्वामियों को उनकी जमीन के वर्तमान बाजार मूल्य से 50-60 प्रतिशत अधिक भुगतान किया जाएगा, ताकि उन्हें उचित मुआवजा मिल सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
मधेपुर लक्ष्मी चौक से तमुरिया अंधराठाढ़ी रामपुर होते हुए भूपट्टी चौक तक लगभग 39 किलोमीटर लंबी सड़क को 7 मीटर तक चौड़ा करने की सैद्धांतिक स्वीकृति भी मिल गई है। यह सड़क जिले की कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगी।
विकास योजनाओं को गति और जनसुविधाओं का विस्तार
जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि जिले में संरक्षित वन भूमि (प्रोटेक्ट फॉरेस्ट लैंड) के कारण विकास योजनाओं की गति प्रभावित नहीं होगी। इस दिशा में गंभीरतापूर्वक कार्रवाई की जा रही है ताकि सभी विकास परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।
जाति आधारित जनगणना के तहत, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। जिले में कुल 4,69,662 परिवारों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 4,37,307 परिवारों को मुख्यमंत्री जीविका योजना, महिला रोजगार योजना और सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत सहायता दी जा चुकी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी पहल की गई है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने बताया कि आंख, कान, गला रोग जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों से रोस्टर बनाकर जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में सेवाएं ली जाएंगी, ताकि चिकित्सकीय सुविधाएं सभी केंद्रों पर समान रूप से उपलब्ध हो सकें।
जिले के सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज की सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसे ध्यान में रखते हुए सात चिन्हित प्रखंडों – खजौली, फुलपरास, बिस्फी, खुटौना, लौकही, बासोपट्टी और हरलाखी में डिग्री कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। खजौली, फुलपरास और बिस्फी में कॉलेज निर्माण के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है, जबकि खुटौना, लौकही, बासोपट्टी और हरलाखी में अगले 15 दिनों में जमीन चिन्हित कर ली जाएगी। भूमि उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में 11 माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें उनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी शामिल है। इसके लिए नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शराब जब्ती के मामलों में वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वारंट निस्तारण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2024 में जहां 4,300 वारंट निपटाए गए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 11,000 हो गई है। जिले को एक मोबाइल फॉरेंसिक वाहन भी मिला है, जो प्रतिदिन 5 से 7 घटनास्थलों पर पहुंचकर साक्ष्य नमूना संग्रह कर जांच में सहयोग कर रहा है।
यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ट्रैफिक डीएसपी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है। स्पीडी ट्रायल की कार्रवाई में भी तेजी आई है; वर्ष 2024 में 31 अपराधियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल हुआ था, जबकि वर्ष 2025 में 38 अपराधियों पर स्पीडी ट्रायल चला, जिसके परिणामस्वरूप दो को फांसी की सजा और 24 को आजीवन कारावास मिला है।


