

Bihar Cold Wave: मधुबनी देशज टाइम्स। जाड़े का मौसम अपने साथ सर्द हवाओं की तलवार लेकर आता है, जिसकी जद में आकर इंसान ही नहीं, पेड़-पौधे और पशु भी ठिठुरने लगते हैं। ऐसे में वक्त रहते बचाव के उपाय न किए जाएं तो यह सर्द लहर जानलेवा साबित हो सकती है। बिहार के मधुबनी जिले में कड़ाके की ठंड और बढ़ती शीत लहर को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने आम जनता से इस एडवाइजरी का कड़ाई से पालन करने की अपील की है, ताकि लोग स्वयं और अपने परिजनों को इस जानलेवा ठंड से सुरक्षित रख सकें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस एडवाइजरी का पालन कर हम न केवल इंसानों बल्कि पेड़-पौधों, फसलों, पक्षियों और पालतू जानवरों को भी शीत लहर के प्रकोप से बचा सकते हैं। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों (CO) और नगर निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में तत्काल अलाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक को जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया गया है। यह सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि कोई भी नागरिक ठंड से परेशान न हो, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Bihar Cold Wave: क्यों जारी हुई जिला प्रशासन की एडवाइजरी?
मधुबनी जिला प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को Bihar Cold Wave के प्रभावों से आगाह करना और बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है। हाल के दिनों में तापमान में आई भारी गिरावट और घना कोहरा छाए रहने के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। फसलों और पशुधन पर भी इसका नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह व्यापक एडवाइजरी जारी की गई है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
ठंड और शीत लहर से होने वाले खतरों को देखते हुए जिला प्रशासन ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन उपायों को अपनाकर आप शीत लहर से बचाव कर सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से भी बच सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस सर्द मौसम में हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
शीत लहर से पहले और उसके दौरान क्या करें और क्या न करें?
शीत लहर के संभावित खतरे को भांपते हुए पूर्व-तैयारी बेहद आवश्यक है। स्थानीय मौसम पूर्वानुमानों पर लगातार नज़र रखें, चाहे वह रेडियो, टीवी या समाचार पत्र हो, ताकि आपको आगामी दिनों में शीत लहर की संभावना की जानकारी मिल सके। अपने घर में सर्दियों के लिए पर्याप्त गर्म कपड़ों का स्टॉक करें। कपड़ों की कई परतें पहनना अधिक प्रभावी होता है, क्योंकि यह शरीर की गर्मी को बेहतर ढंग से बनाए रखता है। आपातकालीन आपूर्ति जैसे भोजन, पानी, ईंधन, बैटरी, चार्जर, आपातकालीन रोशनी और सामान्य दवाएं तैयार रखें। घर में ठंडी हवा के प्रवेश को रोकने के लिए दरवाजों और खिड़कियों को ठीक से बंद करें। ठंड में लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण फ्लू, नाक बहना/भरी नाक या नाक बंद जैसी विभिन्न बीमारियां हो सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसे लक्षणों से बचाव हेतु आवश्यक सावधानी बरतें और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों या डॉक्टर से परामर्श करें।
जब शीत लहर अपने चरम पर हो, तो कुछ सावधानियां बरतना अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- मौसम की जानकारी और आपातकालीन प्रक्रियाओं का बारीकी से पालन करें एवं शासकीय एजेंसियों की सलाह के अनुसार कार्य करें।
- जितना हो सके घर के अंदर रहें और ठंडी हवा, बारिश या बर्फ के संपर्क से बचने के लिए कम यात्रा करें।
- एक परत वाले कपड़े की जगह ढीले-ढाले, परतदार हल्के कपड़े, हवा रोधी/सूती का बाहरी आवरण तथा गर्म ऊनी भीतरी कपड़े पहनें। तंग कपड़े रक्त संचार को रोकते हैं, इनसे बचें।
- खुद को सूखा रखें। शरीर की गरमाहट बनाए रखने हेतु अपने सिर, गर्दन, हाथ और पैर की उंगलियों को पर्याप्त रूप से ढकें। गीले कपड़े तुरंत बदलें।
- बिना उंगली वाले दस्ताने (मिटन) का प्रयोग करें, क्योंकि ये उंगलियों की गरमाहट बचाने में मदद करते हैं। अपने फेफड़ों को बचाने के लिए मुंह तथा नाक ढक कर रखें।
- शरीर की गर्मी बचाए रखने के लिए टोपी/हैट, मफलर तथा आवरण युक्त एवं जलरोधी जूतों का प्रयोग करें। सिर को ढकें क्योंकि सिर की ऊपरी सतह से शरीर की गर्मी का काफी नुकसान होता है।
- स्वास्थ्यवर्धक भोजन करें। पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन-सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।
- गर्म तरल पदार्थ नियमित रूप से पीएं, इससे ठंड से लड़ने के लिए शरीर की गर्मी बनी रहेगी।
- तेल, पेट्रोलियम जेली या बॉडी क्रीम से नियमित रूप से अपनी त्वचा को मॉइस्चराइज़ करें।
- बुजुर्ग लोगों, नवजात शिशुओं तथा बच्चों का विशेष ध्यान रखें एवं ऐसे पड़ोसी जो अकेले रहते हैं, विशेषकर बुजुर्गों का हाल-चाल पूछते रहें।
- आवश्यकतानुसार जरूरी सामग्री का भंडारण करें। पर्याप्त मात्रा में पानी भी रखें, क्योंकि पाइप में पानी जम सकता है। ऊर्जा बचाएं। आवश्यकतानुसार रूम हीटर का उपयोग कमरे के अंदर ही करें, लेकिन पर्याप्त हवा निकासी का प्रबंध अवश्य रखें।
- बंद कमरों में कोयले का प्रयोग न करें, क्योंकि यह कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस पैदा करती है जो जानलेवा हो सकती है। अगर कोयले या लकड़ी को जलाना आवश्यक है, तो उचित चिमनी का प्रयोग करें।
- ज्यादा समय तक ठंड के संपर्क में न रहें। शीत से क्षतिग्रस्त हिस्सों की मालिश न करें, क्योंकि यह त्वचा को और नुकसान पहुंचा सकता है। अचेतावस्था में किसी को कोई तरल पदार्थ न दें।
- शीत लहर के संपर्क में आने पर शीत से प्रभावित अंगों के लक्षणों जैसे संवेदनशून्यता (नंबनेस), सफेद अथवा पीले पड़े हाथ एवं पैरों की उंगलियों, कान की लौ तथा नाक की ऊपरी सतह का ध्यान रखें।
- शीत लहर के अत्यधिक प्रभाव से त्वचा पीली, सख्त एवं संवेदनशून्य तथा लाल फफोले पड़ सकते हैं। यह एक गंभीर स्थिति होती है जिसे गैंगरीन भी कहा जाता है, जो अपरिवर्तनीय होती है। अतः शीत लहर के पहले लक्षण पर ही चिकित्सक की सलाह लें। तब तक अंगों को तत्काल गर्म करने का प्रयास करें, लेकिन अत्यधिक गर्मी से इन अंगों के जलने की संभावना होती है।
- शीत से प्रभावित अंगों को गुनगुने पानी (गर्म पानी नहीं) से इलाज करें। इसका तापमान इतना रखें कि यह शरीर के अन्य हिस्से के लिए आरामदायक हो। कंपकंपी को नजरअंदाज न करें। यह शरीर से गर्मी के ह्रास का पहला संकेत है कि तत्काल गर्मी प्राप्त करने के लिए भवन के अंदर चले जाएं।
- प्रभावित व्यक्ति को गर्म स्थान पर ले जाएं तथा उनके गीले और ठंडे कपड़ों को बदलें।
- प्रभावित व्यक्ति को त्वचा से त्वचा मिलाकर, कंबल, कपड़ों, तौलियों तथा चादरों की परतों द्वारा गर्म करें। उसको हीटर अथवा आग के आसपास रखें।
- उसको गर्म पेय पदार्थ दें जिससे शरीर में गरमाहट बनाए रखने में मदद मिले।
- शीत लहर के प्रभाव से हाइपोथर्मिया हो सकता है। शरीर में गर्मी के ह्रास से कंपकंपी, बोलने में दिक्कत, अनिद्रा, मांसपेशियों में अकड़न, सांस लेने में दिक्कत/निश्चेतन की अवस्था हो सकती है। हाइपोथर्मिया एक खतरनाक अवस्था है जिसमें तत्काल चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता है। शीत लहर/हाइपोथर्मिया से प्रभावित को तत्काल चिकित्सीय सहायता प्रदान कराएं।
कृषि और पशुधन पर शीत लहर का प्रभाव और बचाव के उपाय
शीत लहर और कड़ाके की ठंड कोशिकाओं को भौतिक नुकसान पहुंचाती है, जिससे फसलों में कीटों का आक्रमण और बीमारियां बढ़ सकती हैं, और अंततः फसलें बर्बाद हो सकती हैं। फसल के अंकुरण और प्रजनन के दौरान शीत लहर से काफी भौतिक विघटन होता है, जिससे फसलों के अंकुरण, वृद्धि, पुष्पण और पैदावार पर गहरा असर पड़ता है।
कृषि से संबंधित करने योग्य उपाय:
- बोर्डियॉक्स मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव कर शीत-घात के कारण होने वाले रोग संक्रमण से बचाव करें। शीत लहर के बाद फास्फोरस (P) और पोटेशियम (K) उर्वरकों का उपयोग जड़ वृद्धि को सक्रिय करेगा और फसल को ठंड की घात से तेजी से उबरने में मदद करेगा।
- शीत लहर के दौरान पर्याप्त प्रकाश और लगातार सतह सिंचाई प्रदान करें। पानी की सिंचाई से उत्पन्न विशिष्ट गर्मी पौधों को शीत-घात से बचाती है।
- स्प्रिंकलर सिंचाई से पौधों में शीत-घात को कम करने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि पानी की बूंदों का संघनन आसपास में गर्मी छोड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- शीत-घात/तुषार प्रतिरोधी पौधों/फसलों/किस्मों की खेती करें।
- बारहमासी बगीचों के बीच अंतर्वतीय फसलें उगाएं।
- सब्जियों की मिश्रित फसल, यानी टमाटर, बैंगन को सरसों/मटर जैसी ऊंची फसल के साथ लगाने से ठंडी हवाओं के खिलाफ आवश्यक आश्रय मिलेगा।
- पौधों के मुख्य तने के पास मिट्टी को काली या चमकीली प्लास्टिक शीट से ढकें। यह विकिरण अवशोषित कर मिट्टी को ठंडी में भी गर्म बनाए रखता है। प्लास्टिक उपलब्ध न होने की दशा में घास-फूस, सरकंडे की घास या जैविक वस्तुओं से मिट्टी को ढंककर फसलों को शीत-घात से बचाया जा सकता है।
- हवा अवरोध/वातरोधक सुरक्षा पट्टी के लिए पौध रोपण, हवा की गति को कम करके शीत-घात से फसलों को बचाते हैं।
- बगीचे में धुआं करके भी फसलों को शीत-घात से बचाया जा सकता है।
शीत लहरों के दौरान जानवरों और पशुधन को जीवित रहने के लिए अधिक भोजन की आवश्यकता होती है, क्योंकि ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ जाती है। तापमान में अत्यधिक भिन्नता भैंसों/मवेशियों की प्रजनन दर को भी प्रभावित कर सकती है।
पशुपालन/पशुधन से संबंधित करने योग्य उपाय:
- ठंडी हवाओं के सीधे संपर्क से बचने के लिए रात के दौरान सभी पशु आवास को सभी दिशाओं से ढकें।
- ठंड के दिनों में छोटे पशुओं को ढक कर रखें।
- दुधारू पशु एवं कुक्कुट को ठंड से बचाने हेतु अंदर रखें।
- पशुधन के आहार एवं खान-पान में वृद्धि करें।
- उच्च गुणवत्ता वाले चारा या चारागाहों का उपयोग करें।
- वसा की खुराक प्रदान करें, आहार सेवन तथा उनके चबाने के व्यवहार का ध्यान रखें।
- जलवायु-अनुरूप शेड का निर्माण करें जो सर्दियों के दौरान अधिकतम सूरज की रोशनी और गर्मियों के दौरान कम विकिरण की अनुमति देते हैं।
- इन स्थितियों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त पशु नस्लों का चयन करें।
- सर्दियों के दौरान जानवरों के बैठने हेतु सूखे भूसे रखें।
- पालतू जानवरों, पशुधन को शीत लहर से बचाने हेतु भवन के अंदर रखें तथा उन्हें कंबल से ढकें।



