

मधुबनी न्यूज़: जिले के अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए बने ‘विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान’ में देर रात हड़कंप मच गया। खुद जिलाधिकारी आनंद शर्मा अचानक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। उनके इस औचक दौरे ने न सिर्फ संस्थान की कार्यप्रणाली को खंगाला, बल्कि पांच मासूम जिंदगियों की देखभाल की जमीनी हकीकत भी सामने ला दी। क्या थी वो सच्चाई, जिसने डीएम को भी गहन समीक्षा के लिए मजबूर किया?
09 दिसंबर 2055 को मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने देर शाम ‘विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान’ का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान संस्थान में पाँच बच्चे रह रहे थे। जिलाधिकारी ने एक-एक कर सभी बच्चों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य स्थिति, शिक्षा तथा उनके पुनर्वासन/दत्तक प्रक्रिया से संबंधित प्रगति की गहन समीक्षा की।
बच्चों की सुरक्षा और बेहतर देखभाल पर जोर
निरीक्षण के दौरान, जिलाधिकारी ने सभी बच्चों से संबंधित संधारित संचिकाओं (केस फाइल) का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने अभिलेखों की अद्यतन स्थिति, वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुपालन और बच्चों के हित में की जा रही व्यवस्थाओं की जांच की। जिलाधिकारी ने बच्चों की सुरक्षा, पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, उनके भावनात्मक-मानसिक विकास, साथ ही संस्थान की साफ-सफाई और समग्र व्यवस्था पर विशेष बल दिया। उन्होंने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए।
अनाथ और बेसहारा बच्चों का महत्वपूर्ण केंद्र
यह उल्लेखनीय है कि विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान जिला स्तर पर 6 वर्ष से कम आयु के अनाथ और बेसहारा बच्चों को आवास, संरक्षण, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और दत्तक ग्रहण से संबंधित महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करता है। जिलाधिकारी ने संस्थान को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निर्धारित सभी मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और उज्जवल बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
निरीक्षण में शामिल रहे अधिकारी
इस औचक निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी और कर्मी उपस्थित थे। इनमें सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग नितेश कुमार पाठक, बाल संरक्षण पदाधिकारी अजय कुमार, समन्वयक (विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान) भवेश कुमार और डाटा एनालिस्ट प्रमोद कुमार सहित संस्थान के अन्य स्टाफ सदस्य शामिल थे।

