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फ़रवरी, 19, 2026
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बदलेगा मधुबनी का हेल्थ सिस्टम: डीएम आनंद शर्मा का मैसेज…और जब बात जन-जन के स्वास्थ्य की हो, तो पढ़िए

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Health Department Review: जीवन की सबसे अनमोल पूंजी है स्वास्थ्य, और जब बात जन-जन के स्वास्थ्य की हो, तो प्रशासन का हर कदम अहम हो जाता है। मधुबनी में जिलाधिकारी ने इसी अहम जिम्मेदारी को निभाते हुए एक बड़ी पहल की है।

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मधुबनी में स्वास्थ्य विभाग समीक्षा: जिलाधिकारी ने दिए कड़े निर्देश, पोलियो उन्मूलन और संस्थागत प्रसव पर विशेष जोर

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मधुबनी में स्वास्थ्य विभाग समीक्षा: जिलाधिकारी आनंद शर्मा के अहम निर्देश

मधुबनी (14 दिसंबर 2025): जिला पदाधिकारी सह अध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति, मधुबनी आनंद शर्मा ने कल देर शाम स्वास्थ्य विभाग की गहन समीक्षा की। यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विभाग समीक्षा जिले के स्वास्थ्य परिदृश्य को बेहतर बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने का मंच बनी। जिलाधिकारी ने विशेष पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया, जो 16 से 20 दिसंबर तक चलाया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस अभियान को पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ सफल बनाने के निर्देश दिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पल्स पोलियो अभियान की अवधि में कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। इसके लिए सभी बूथों, ट्रांजिट टीमों एवं मोबाइल टीमों की सक्रिय तैनाती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज और संवेदनशील इलाकों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कर्मियों एवं स्वयंसेवकों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आह्वान किया, ताकि जिले को पोलियो मुक्त बनाए रखने का लक्ष्य पूर्ण रूप से हासिल हो सके।

बैठक में ऑनलाइन कंसल्टेशन नहीं करने वाले चिकित्सकों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया। परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत स्थायीकरण ऑपरेशन एवं PPI में जिला औसत 54% से अधिक करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत करने का भी निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिया गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। नियमित टीकाकरण में शत-प्रतिशत पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त करने पर भी जोर दिया गया।

संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कवायद

जिलाधिकारी ने वैसे सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों को क्रियाशील करने का निर्देश दिया, जहाँ वर्तमान में प्रभावी चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं। 25 ऐसे उपकेंद्रों को चिह्नित कर यथाशीघ्र क्रियाशील करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने सिविल सर्जन को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में, जहाँ अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है, वहाँ इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ शीघ्र ही उपलब्ध कराया जाए। जिलाधिकारी ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को सप्ताह में दो दिन अपने क्षेत्र के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों सहित निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होम का नियमित निरीक्षण करने और निरीक्षण प्रतिवेदन सिविल सर्जन कार्यालय में भेजने का निर्देश दिया।

संस्थागत प्रसव में वृद्धि लाना एक प्रमुख प्राथमिकता थी। जिलाधिकारी ने डीसीएम को संस्थागत प्रसव की आशावार और प्रखंड स्तर पर समीक्षा करने का निर्देश दिया, साथ ही लाइन लिस्टिंग के साथ प्रारंभ से लेकर संस्थागत प्रसव तक की विस्तृत रिपोर्ट प्रत्येक माह उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को आईएफए एवं कैल्शियम टेबलेट शत प्रतिशत उपलब्ध कराने के लिए एएनएम के माध्यम से विशेष प्रयास करने का निर्देश दिया। सभी बीसीएम को आशावार उपलब्धि की समीक्षा करने के लिए कहा गया, ताकि यह पता चल सके कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा कहाँ प्रसव कराया गया है। अच्छा प्रदर्शन करने वाली आशा कर्मियों को प्रोत्साहित करने और बिना किसी विशेष कारण के गर्भवती महिलाओं को निजी नर्सिंग होम में भेजने वाली आशा एवं एएनएम को चिह्नित कर उन पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसमें किसी भी प्रकार के बिचौलियों की भूमिका पर कड़ी नजर रखने और चतुर्थ एएनसी के बाद विशेष ध्यान बनाए रखने का निर्देश दिया गया।

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जिलाधिकारी ने सभी कर्मियों एवं डॉक्टरों की रोस्टर के हिसाब से उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। स्वास्थ्य संस्थानों में दवा की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आवश्यक मात्रा में दवा का इंडेन्ट किया गया हो। दवा की कमी की स्थिति में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी जिम्मेदार होंगे, और किसी भी परिस्थिति में मरीज को दवा बाहर से क्रय नहीं करनी पड़े, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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कार्य में शिथिलता एवं लापरवाही को लेकर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मधेपुर, फुलपरास, खजौली, कलुआही, मधवापुर, बाबूबरही, लदनिया, बासोपट्टी और हरलाखी से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया गया। यह निर्देश निजी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कार्य की सतत मॉनिटरिंग नहीं किए जाने के कारण दिया गया। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक सप्ताह सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी निजी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ बैठक कर समीक्षा करें।

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आयुष्मान भारत की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने आयुष्मान कार्ड बनवाने हेतु प्रतिमाह 3 दिन का विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आशा ऐप को शत प्रतिशत क्रियान्वित करते हुए सभी आशा कर्मियों द्वारा सभी प्रकार के डाटा को इस ऐप पर दर्ज किया जाए। कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भी अधिक से अधिक आयुष्मान कार्ड बनवाने को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, क्योंकि आयुष्मान कार्ड जरूरतमंदों के लिए अमृत के समान है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल सहित सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में सी-सेक्शन नियमित रूप से करने को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और पूरे माह में मात्र एक सी-सेक्शन करने वाले चिकित्सकों के प्रति गहरा असंतोष व्यक्त किया। रोगी कल्याण समिति की बैठकें नियमित रूप से करने का भी निर्देश दिया गया।

जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के उपस्थित जिला स्तरीय पदाधिकारियों एवं सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अवैध नर्सिंग होम एवं अल्ट्रासाउंड केंद्रों को लेकर लगातार जाँच अभियान चलाने और दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने पंजीकृत नर्सिंग होम एवं अल्ट्रासाउंड केंद्रों की भी जाँच कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि वे विभागीय दिशा-निर्देशों एवं मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करें।

उक्त बैठक में अपर समाहर्ता मुकेश रंजन, अपर समाहर्ता आपदा संतोष कुमार, सिविल सर्जन मधुबनी डॉ. हरेंद्र कुमार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, डीएमओ दया शंकर सिंह, डीपीएम पंकज कुमार, डीपीओ आईसीडीएस, जिला स्वास्थ्य समिति के सभी सलाहकार, सभी स्वास्थ्य अधीक्षक व उपाधीक्षक, जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक एवं प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधकों आदि उपस्थित थे।

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