

Filaria Eradication: हवा में तैरता एक अदृश्य खतरा, जो मच्छर के एक डंक से आपके जीवन में अंधेरा भर सकता है। इसी जानलेवा बीमारी से मधुबनी को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने Filaria Eradication को लेकर कमर कस ली है और एक बड़े अभियान का शंखनाद किया है।
Filaria Eradication को लेकर स्वास्थ्य विभाग का एक्शन मोड
मधुबनी जिले को फाइलेरिया से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। आगामी 10 फरवरी 2026 से शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन (MDA) कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बुधवार को सदर अस्पताल में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। एसीएमओ, डॉ. एसएन झा की अध्यक्षता में हुई इस जिला समन्वय समिति की बैठक में अभियान की पूरी रूपरेखा तैयार की गई। पिरामल संस्था के कार्यक्रम लीड धीरज सिंह ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि फाइलेरिया, जिसे आम भाषा में हाथीपांव भी कहते हैं, मच्छर के काटने से फैलता है और यह शरीर के लसीका तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भारत सरकार ने 2027 तक देश से इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर डी.एस. सिंह ने जिले के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि मधुबनी में कुल 1850 फाइलेरिया के मरीज हैं। इनमें से 1350 लिम्फोडिमा और 500 हाइड्रोसील से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता का ही नतीजा है कि इनमें से 428 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है, जबकि 242 मरीजों को विशेष एमएमडीपी किट भी उपलब्ध कराई गई है। विभाग लगातार सर्वे के माध्यम से नए मरीजों की पहचान कर उन्हें हर संभव मदद पहुंचा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कैसे और किसे खानी है दवा? समझें पूरी गाइडलाइन
इस महाअभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर 2 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को मुफ्त में दवा खिलाएंगे। दवा का सेवन सही तरीके से हो, इसके लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह समझना बेहद जरूरी है कि दवा को खाली पेट नहीं खाना है और इसे चबाकर ही निगलना है।
- 2 से 5 वर्ष के बच्चों को: डीईसी और अल्बेंडाजोल की एक-एक गोली दी जाएगी।
- 6 से 14 वर्ष के आयु वर्ग को: डीईसी की दो गोलियां और अल्बेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी।
- 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को: डीईसी की तीन गोलियां और अल्बेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी।
हालांकि, गर्भवती महिलाओं, 2 साल से कम उम्र के बच्चों और किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
समाज की भागीदारी से ही संभव होगा फाइलेरिया का खात्मा
डॉक्टर डी.एस. सिंह ने सभी विभागों और आम नागरिकों से इस अभियान में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा, “फाइलेरिया उन्मूलन सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने बचाव के उपायों पर जोर देते हुए कहा कि मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें, अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। हाइड्रोसील का इलाज ऑपरेशन से संभव है, जबकि लिम्फेडेमा के मरीजों को एमएमडीपी किट से राहत मिलती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी लोग दवा का सेवन करें और मच्छरों को पनपने से रोकें, तो मधुबनी निश्चित रूप से 2027 तक फाइलेरिया मुक्त जिला बन जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान डीपीआरओ परिमल कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज मिश्रा, डिंपू कुमार, अमर कुमार, लक्ष्मी झा, पिरामल से धीरज सिंह, कुश कुमार और सीफार से अमन कुमार सहित कई अन्य पदाधिकारी एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

