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फ़रवरी, 20, 2026
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Madhubani में 10 साल बाद मिला इंसाफ: प्रेमी से बना पति, फिर खेली खूनी खेल, पत्नी के हत्यारे लोभी पति को 7 साल की सजा

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मधुबनी में 2014 का दहेज हत्या केस निपटा! रमाशंकर महतो को मिली 7 साल की सजादहेज नहीं मिला तो मार डाला पत्नी को! अब कोर्ट ने सुनाया 7 साल का फैसला।10 साल बाद मिला इंसाफ! दहेज के लालच में सुमन की हत्या करने वाले पति को 7 साल की सजा।प्रेम विवाह बना मौत की वजह! सुमन की हत्या करने वाले रमाशंकर को 7 साल की जेल@मधुबनी, देशज टाइम्स ब्यूरो।

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Bullet Points: 7 साल की सश्रम सजा, अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय ललन कुमार की अदालत

मामला: 2014 में दहेज हत्या का केस, बाबूबरही थाना, मधुबनी। पीड़िता: सुमन कुमारी, निवासी – हरियरी, फुलपरास। आरोपी: रमाशंकर महतो, पति। अभियोग: धारा 304B (दहेज हत्या)। FIR: सुमन की मां घनवंती देवी ने दर्ज कराई। फैसला: 7 साल की सश्रम सजा, अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय ललन कुमार की अदालत। लोक अभियोजक: संजय कुमार। बचाव पक्ष वकील: ब्रजनंदन झा।@मधुबनी,देशज टाइम्स ब्यूरो।

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Madhubani Dowry Case Verdict | 10 साल बाद मिला इंसाफ: दहेज हत्या मामले में पति को 7 साल की सजा 

मधुबनी, देशज टाइम्स ब्यूरो। बाबूबरही थाना क्षेत्र में एक दशक पुराने दहेज हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय ललन कुमार की अदालत ने सुमन कुमारी की हत्या के मामले में उसके पति रमाशंकर महतो को दोषी करार देते हुए IPC की धारा 304B के तहत 7 साल की सजा सुनाई है।

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Madhubani Dowry Case Verdict | प्रेमजाल में फंसाकर की थी शादी, फिर मांगा दहेज

सरकारी पक्ष के अपर लोक अभियोजक संजय कुमार ने अदालत को बताया कि आरोपी रमाशंकर महतो ने फुलपरास थाना क्षेत्र के हरियरी गांव निवासी घनवंती देवी की बेटी सुमन कुमारी से प्रेम विवाह किया था।

शादी के कुछ समय बाद ही रमाशंकर ने दहेज में ₹1 लाख और बाइक की मांग शुरू कर दी। जब सुमन की ओर से दहेज नहीं मिला, तो उसे लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाने लगी।

पंचायत से समाधान नहीं, हुई हत्या

परिजनों ने पंचायत के माध्यम से विवाद सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार, रमाशंकर महतो ने सुमन की हत्या कर दी। घटना के बाद सुमन की मां घनवंती देवी ने 10 जून 2014 को बाबूबरही थाना में FIR दर्ज कराई थी।

10 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला

मामला करीब 10 साल तक अदालत में चला। सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने अदालत से अधिकतम सजा की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ब्रजनंदन झा ने दलील दी कि आरोपी को कम से कम सजा दी जाए।

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7 साल की सजा सुनाई अदालत ने

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने रमाशंकर महतो को 7 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला उस परिवार के लिए दशक भर बाद न्याय की उम्मीद लेकर आया है, जिन्होंने अपनी बेटी को दहेज की बलि चढ़ते देखा था।

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