

मधुबनी देशज टाइम्स: जिले में एक जघन्य अपराध पर अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है, जो अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। एक नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को जिला कोर्ट ने लंबी कैद और भारी जुर्माने की सज़ा सुनाई है। इस फैसले ने न सिर्फ पीड़ित को न्याय दिया है, बल्कि समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक मजबूत संदेश भी दिया है।
मधुबनी जिला कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-7) ने शनिवार को दुष्कर्म के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोषी सूरज साहनी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई है, साथ ही उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे अपराधों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 28 जनवरी 2024 का है, जब मधुबनी जिले के बेनीपट्टी थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की शाम के समय शौच के लिए बाहर गई थी। उसी दौरान बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के रहने वाले सूरज साहनी ने घात लगाकर उसे पकड़ा। आरोप है कि सूरज साहनी जबरन नाबालिग लड़की को पास के जंगल में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद, पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए बेनीपट्टी थाना में आवेदन दिया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। जांच के उपरांत मामला दर्ज किया गया और आरोपी सूरज साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की सुनवाई तेजी से चली और शनिवार को कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाया।
किन धाराओं में हुई सज़ा?
विशेष लोक अभियोजक कुमारी मधु रानी के अनुसार, दोषी सूरज साहनी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323, धारा 376 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी ठहराया गया।
- धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना) के तहत एक वर्ष की सज़ा सुनाई गई।
- धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत 20 वर्ष की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई गई।
- साथ ही, दोषी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजक कुमारी मधु रानी ने यह भी बताया कि यदि दोषी जुर्माने की यह राशि जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त छह माह तक जेल में रहना होगा। कोर्ट का यह फैसला पीड़ित को न्याय दिलाने के साथ-साथ समाज में ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


