

Madhubani News: जब उम्मीद की डोर टूटने लगती है और सांसे थमने लगती हैं, तब खाकी वर्दी वाले फरिश्ते बनकर आते हैं। मधुबनी के बेनीपट्टी में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां पुलिस की सूझबूझ ने दो परिवारों की खुशियां लौटा दीं। यह मामला मधुबनी जिले के बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के गांगुली गांव का है, जहां दो मासूम भाई खेलते-खेलते लापता हो गए थे, लेकिन पुलिस ने महज दस घंटे के भीतर उन्हें सकुशल ढूंढ निकाला।
घटना 15 फरवरी 2026 की शाम लगभग साढ़े पांच बजे की है। गांगुली गांव के रहने वाले राकेश राय के आठ वर्षीय पुत्र रितिक कुमार और राम कुमार के छह वर्षीय पुत्र शिव कुमार घर के बाहर खेल रहे थे। जब काफी देर तक बच्चे घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। हर संभावित जगह पर तलाश करने के बाद भी जब उनका कुछ पता नहीं चला, तो परिवार वालों के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में उन्होंने बेनीपट्टी थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
Madhubani News: जानिए कैसे पुरानी कार बन गई मासूमों के लिए कैदखाना
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी शिव शरण साह ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। पुलिस ने ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव और आसपास के इलाकों को खंगालना शुरू किया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि दोनों बच्चे गांव से करीब सौ मीटर दूर एक सुनसान जगह पर खड़ी एक पुरानी, जंग लगी कार के आसपास खेल रहे थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उत्सुकतावश दोनों भाई कार के अंदर दाखिल हो गए, लेकिन दुर्भाग्य से दरवाजा अंदर से लॉक हो गया।
जंग लगे होने के कारण बच्चे दरवाजा नहीं खोल सके और पूरी रात उसी कार में कैद रहे। ठंड की रात में भूख-प्यास से बेहाल दोनों मासूमों की जान पर बन आई थी। पुलिस टीम ने जब उस कार की तलाशी ली, तो अंदर बच्चों को देखकर सभी ने राहत की सांस ली। पुलिस ने बिना देर किए कार का दरवाजा तोड़ा और दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
पुलिस की तत्परता ने टाली बड़ी अनहोनी
बच्चों को कार से निकालने के बाद तत्काल उनकी चिकित्सकीय जांच कराई गई। डॉक्टरों द्वारा स्वस्थ बताए जाने पर दोनों बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। अपने जिगर के टुकड़ों को सही सलामत देखकर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने बेनीपट्टी पुलिस का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया और उन्हें खूब आशीर्वाद दिया। इस सफल पुलिस कार्रवाई ने आम लोगों में खाकी के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है।
थाना प्रभारी शिव शरण साह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, “लापता बच्चों की सूचना मिलते ही हमारी टीमें सक्रिय हो गई थीं। हमने सीसीटीवी फुटेज और ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर लोकेशन को ट्रेस किया। यह हमारी टीम की त्वरित कार्रवाई का ही नतीजा है कि हम बच्चों को समय रहते ढूंढ पाए।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अभिभावकों के लिए एक बड़ी सीख
यह घटना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लावारिस पड़े अनुपयुक्त वाहनों से उत्पन्न होने वाले खतरों की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के पुराने वाहनों को हमेशा लॉक करके रखना चाहिए ताकि कोई बच्चा खेल-खेल में इसका शिकार न बन जाए। वहीं, जिला प्रशासन ने भी इस घटना के बाद सभी अभिभावकों को अधिक सतर्क रहने और अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने की सलाह दी है। मधुबनी पुलिस की यह सफलता न केवल अपराध नियंत्रण का, बल्कि एक मानवीय सेवा का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।


