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Madhubani Rojgar News: मधुबनी पेंटिंग ने बदली महिला उद्यमी की जिंदगी, मिला सम्मान और रोजगार! पढ़िए – आधुनिक आयाम वाली रहिका की प्रीति

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की मदद से रहिका निवासी प्रीति कुमारी ने मधुबनी पेंटिंग को बनाया आजीविका का सशक्त माध्यम। उनकी लगन और कला ने न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाया बल्कि दस अन्य महिला कारीगरों को भी रोजगार देकर उनके जीवन में खुशहाली लाई, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।

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Madhubani Rojgar News: मधुबनी जिले की एक उद्यमी, प्रीति कुमारी ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) की वित्तीय सहायता का लाभ उठाकर अपनी किस्मत बदली है। रहिका प्रखंड की निवासी प्रीति कुमारी ने अपनी कला और दृढ़ संकल्प से मधुबनी पेंटिंग को केवल एक कला माध्यम नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय में बदल दिया है। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी कई युवाओं के लिए एक मिसाल बन रही है, जो स्वरोजगार की तलाश में हैं और अपनी पारंपरिक कला को आधुनिक व्यवसाय का रूप देना चाहते हैं।

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पारंपरिक कला को दिया आधुनिक आयाम

प्रीति कुमारी को बचपन से ही मिथिलांचल की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग की पारंपरिक कला में गहरी रुचि थी। उन्होंने न केवल इस कला को सीखा, बल्कि इसमें अपनी रचनात्मकता का भी समावेश किया। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने अपनी इस जन्मजात रुचि को एक पेशेवर और टिकाऊ उद्यम में बदलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उनका लक्ष्य केवल पैसे कमाना नहीं था, बल्कि इस सदियों पुरानी कला को संरक्षित करते हुए उसे एक नई पहचान दिलाना भी था।

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वर्ष 2018 में, प्रीति ने अपने सपने को साकार करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत 3.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त की। यह आर्थिक मदद उनके लिए संजीवनी साबित हुई, जिससे उन्हें अपनी मधुबनी पेंटिंग इकाई स्थापित करने में काफी सहायता मिली। इस इकाई की स्थापना के साथ ही उनके उद्यम की औपचारिक नींव रखी गई, जो बाद में कई परिवारों के लिए आजीविका का स्रोत बनी।

चुनौतियों से भरा था शुरुआती सफर

किसी भी नए व्यवसाय की तरह, प्रीति को भी अपने शुरुआती सफर में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सबसे पहले, उन्हें मधुबनी पेंटिंग के लिए कुशल कारीगरों की तलाश थी, जो इस कला के बारीक पहलुओं को समझते हों और उनके साथ मिलकर काम कर सकें। इसके अलावा, पेंटिंग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक रंगों और अन्य कच्चे माल को उचित मूल्य पर व्यवस्थित करना भी एक बड़ी समस्या थी। बाजार में ऐसे उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती थी।

इन बाधाओं के अलावा, अपने तैयार उत्पादों के लिए एक विश्वसनीय और व्यापक बाजार खोजना भी उनके सामने एक प्रमुख समस्या थी। पारंपरिक बाजारों से हटकर उन्हें ऐसे प्लेटफार्म्स की तलाश थी, जहाँ उनकी कलाकृतियों को सही पहचान और मूल्य मिल सके। हालांकि, प्रीति कुमारी ने इन सभी चुनौतियों से हार नहीं मानी। उन्होंने अदम्य धैर्य, अटूट लगन और निरंतर प्रयासों से इन सभी समस्याओं का एक-एक करके समाधान निकाला। उन्होंने स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण दिया, विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क साधा और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपने उत्पादों का प्रचार किया।

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनी प्रीति

आज, प्रीति कुमारी की इकाई द्वारा निर्मित मधुबनी पेंटिंग की मांग देश के विभिन्न हिस्सों में तेजी से बढ़ रही है। उनकी कलाकृतियाँ अपनी अद्वितीय गुणवत्ता, मौलिकता और पारंपरिक सौंदर्य के लिए जानी जाती हैं, जिससे उन्हें कला जगत में एक विशिष्ट पहचान मिली है। ग्राहक उनकी पेंटिंग को घरों की सजावट से लेकर उपहार देने तक के लिए पसंद कर रहे हैं।

इस उद्यम की सबसे बड़ी सफलता यह है कि प्रीति कुमारी ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उन्होंने अपने साथ लगभग दस अन्य महिला कारीगरों को भी स्थायी रोजगार प्रदान किया है। इन महिलाओं को रोजगार मिलने से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। वे अब अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार की अन्य जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं। इसके साथ ही, इन महिला कारीगरों के आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि हुई है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। PMEGP Bihar News के तहत मिली यह सफलता एक मॉडल के रूप में देखी जा सकती है, जो बताता है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कैसे समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने का है लक्ष्य

प्रीति कुमारी का लक्ष्य अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तार देना तथा मधुबनी पेंटिंग को राष्ट्रीय सीमाओं से परे ले जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, वे अतिरिक्त पूंजी जुटाने और अपने कारीगरों के कौशल को और बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही हैं। उनका मानना है कि मधुबनी पेंटिंग में वैश्विक बाजार में अपनी अनूठी जगह बनाने की पूरी क्षमता है, बशर्ते इसे सही मंच और प्रोत्साहन मिले।

उन्होंने युवा उद्यमियों को संदेश देते हुए कहा कि बिहार में कुशल कारीगरों और बाजार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि युवा पीढ़ी आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ अपने उद्यम स्थापित करें, तो वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अनगिनत अवसर पैदा कर सकते हैं। यह राज्य के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा और स्थानीय कला एवं शिल्प को बढ़ावा देगा।

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प्रीति कुमारी की यह कहानी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, थोड़ी सी सरकारी सहायता और व्यक्तिगत लगन से कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उनकी सफलता मधुबनी की पारंपरिक कला को एक नई पहचान दे रही है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, जिससे अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरणा मिल रही है।

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