

मधुबनी न्यूज़: देश में ‘एक कानून, एक अधिकार’ की बहस के बीच बिहार के एक सांसद का तीखा बयान सामने आया है. क्या है ‘विशेष हक’ और ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति पर उनकी राय, और क्यों उन्होंने ‘जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वालों को पाकिस्तान देखने की सलाह दी? पढ़िए इस पूरे मामले पर विस्तार से…
सांसद अशोक यादव का बड़ा बयान: ‘विशेष हक’ नहीं, ‘समान कानून’; ‘जिहाद’ वाले देखें पाकिस्तान
एक देश, एक कानून: सांसद की दो टूक
मधुबनी से भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. अशोक कुमार यादव ने आज एक साक्षात्कार में देश के कानून-व्यवस्था और समाज में समानता पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत में सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून होना चाहिए और किसी को भी कोई विशेष विशेषाधिकार नहीं मिलना चाहिए। सांसद यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में समान नागरिक संहिता और विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग कानूनों को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है।
मोदी सरकार की योजनाओं का ‘समान लाभ’
डॉ. यादव ने केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज सरकार की सभी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग, हर समुदाय और देश के हर क्षेत्र के लोगों तक समान रूप से पहुँच रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूल मंत्र पर काम कर रही है, जिसके तहत कल्याणकारी योजनाओं का फायदा अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जा रहा है, भले ही उसकी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
‘विशेष हक’ और तुष्टिकरण की राजनीति पर प्रहार
सांसद ने आगे कहा कि इन सबके बावजूद, आज भी कुछ राजनीतिक दल और व्यक्ति ‘विशेष हक़’ और ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने ऐसी सोच को देश की एकता और समानता के लिए बाधक बताया। डॉ. यादव के अनुसार, यह मानसिकता समाज में भेदभाव पैदा करती है और कुछ खास वर्गों को अनावश्यक लाभ देने की वकालत करती है, जबकि आधुनिक भारत में सभी को समान अवसर मिलने चाहिए।
‘जिहाद’ वाले पाकिस्तान देखें: तीखा पलटवार
अपने बयान के अंत में, डॉ. अशोक कुमार यादव ने ‘जिहाद’ जैसी भाषा का प्रयोग करने वालों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन्हें ‘जिहाद’ जैसी शब्दावली का इस्तेमाल करना है, उन्हें भारत की बजाय पाकिस्तान देख लेना चाहिए। सांसद ने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान में असली अत्याचार किस पर हो रहा है, यह बात पूरी दुनिया जानती है। उनका यह बयान उन तत्वों को स्पष्ट संदेश माना जा रहा है जो धार्मिक आधार पर विद्वेष फैलाने की कोशिश करते हैं।

