

मधुबनी न्यूज़: पटना हाईकोर्ट की एक वरिष्ठ न्यायमूर्ति अपने दौरे पर मधुबनी पहुंचीं और झंझारपुर सिविल कोर्ट में चल रहे निर्माण कार्य की धीमी गति पर जमकर बिफरीं। उन्होंने निर्माण एजेंसी को चेतावनी दी कि अगर अगले महीने तक काम पूरा नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। क्या था पूरा मामला और न्यायमूर्ति ने क्यों दी इतनी कड़ी चेतावनी? आइए जानते हैं…
अपने तीन दिवसीय मधुबनी दौरे के दूसरे दिन, पटना हाईकोर्ट की निरीक्षी न्यायमूर्ति गुन्नु अनुपमा चक्रवर्ती शनिवार को झंझारपुर सिविल कोर्ट के निरीक्षण के लिए पहुंचीं। इस महत्वपूर्ण दौरे पर उनके साथ मधुबनी जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी. भी मौजूद थीं। न्यायमूर्ति चक्रवर्ती का मुख्य उद्देश्य कोर्ट परिसर में चल रहे कार्यों का जायजा लेना था।
निर्माण में देरी पर भड़कीं न्यायमूर्ति
झंझारपुर पहुंचते ही निरीक्षी न्यायमूर्ति ने सबसे पहले निर्माणाधीन कोर्ट भवन का गहन निरीक्षण किया। निर्माण कार्य की धीमी गति देखकर न्यायमूर्ति चक्रवर्ती काफी नाराज हुईं। उन्होंने निर्माण कार्य एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि फरवरी माह तक कार्य पूरा नहीं किया गया, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। न्यायमूर्ति ने भवन निर्माण एजेंसी को निर्देश दिया कि कार्य में तेजी लाई जाए, क्योंकि मार्च में नए कोर्ट भवन का उद्घाटन किया जाना है। उन्होंने कहा कि अगर फरवरी में उनके अगले निरीक्षण तक काम पूरा नहीं हुआ, तो सीधे जेल भेजने की कार्रवाई होगी।
न्यायिक कामकाज का जायजा और अधिवक्ताओं की मांगें
निर्माणाधीन भवन के निरीक्षण के बाद, निरीक्षी न्यायमूर्ति ने व्यवहार न्यायालय के सर्किट कोर्ट में विभिन्न न्यायालयों की संचिकाओं का अवलोकन किया। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में सुधार लाया जा सके। इसी अवसर पर, उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए बनाए गए पार्किंग परिसर का लोकार्पण भी किया, जिससे उन्हें सुविधा मिल सके।
अधिवक्ता संघ ने न्यायमूर्ति श्रीमती चक्रवर्ती और जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी. का मिथिला की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भव्य स्वागत किया। उन्हें पाग, दोपटा और मखान की माला पहनाकर सम्मानित किया गया। अतिथि द्वय को मिथिला पेंटिंग भी भेंट की गई। स्कूली छात्राओं ने उनके सम्मान में स्वागत गान प्रस्तुत किया, जिससे माहौल खुशनुमा हो गया। इस दौरान स्कूली बच्चों को उपहार भी दिए गए।
अधिवक्ताओं ने निरीक्षी न्यायमूर्ति के समक्ष अपनी महत्वपूर्ण मांगें रखीं:
- व्यवहार न्यायालय में एक स्पेशल जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना हो।
- इस स्पेशल कोर्ट में फैमिली कोर्ट, पॉस्को (POCSO) एवं जुवेनाइल कोर्ट की शक्तियां समाहित हों।
ऐतिहासिक दौरा और महिला जजों की प्रतिबद्धता
सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए, निरीक्षी न्यायमूर्ति श्रीमती चक्रवर्ती ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि उनकी विभिन्न मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उन पर काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि वह नव वर्ष के फरवरी माह में दोबारा झंझारपुर का दौरा करेंगी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी. ने अपने संबोधन में इस दौरे के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि झंझारपुर के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब जिला एवं सत्र न्यायाधीश और उच्च न्यायालय की निरीक्षी न्यायमूर्ति दोनों महिलाएं एक साथ यहां पधारी हैं। उन्होंने अधिवक्ताओं को झंझारपुर व्यवहार न्यायालय को और बेहतर बनाने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता मौजूद थे, जिनमें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सुशील दीक्षित, द्वितीय पाठक आलोक कौशिक, तृतीय अनिल कुमार राम, चतुर्थ नयन कुमार, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विजय कुमार मिश्रा, हिमांशु पांडेय, एसडीजेएम आनंद राज, मुंसिफ सुमित कुमार, न्यायिक पदाधिकारी प्रथम फसीहा नाज फातिमा, शिखा कुमारी, शारिक रहमान, नफीस कामरान, कर्मी अवकाश मिश्र, रौशन सिंह, संतोष भारती, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष परशुराम मिश्र, महासचिव अरविंद कुमार वर्मा, पूर्व अध्यक्ष रामफल महतो, पूर्व महासचिव कुमार जितेंद्र, धीरेंद्र मिश्रा, बलराम यादव, हरिमोहन लाल दास, राम उदगार यादव, संजय कुमार, बेचन राय और कई अन्य वरीय अधिवक्ता व अधिवक्ता लिपिक शामिल थे।


