

Upendra Kushwaha: सियासत की बिसात पर जब ‘परिवार’ का मोहरा चलता है, तो अपने ही किलों में दरारें पड़ जाती हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में भी कुछ ऐसा ही घमासान मचा है, जहां पार्टी सुप्रीमो के एक फैसले ने अपनी ही टीम में खलबली मचा दी है। यह मामला तब और गरमा गया जब मधुबनी में मंत्री बने बेटे के कार्यक्रम से स्थानीय विधायक ने ही किनारा कर लिया।
मंत्री बेटे पर Upendra Kushwaha के दांव से विधायक नाराज?
मामले की शुरुआत 20 नवंबर 2024 को हुए नीतीश सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जब RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिलाकर सबको चौंका दिया। दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, जबकि पार्टी के पास चार विधायक हैं, जिनमें से एक खुद कुशवाहा की पत्नी स्नेह लता हैं। इस फैसले के बाद से ही पार्टी के तीन विधायकों- माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो की नाराजगी की खबरें सतह पर तैरने लगीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये विधायक सरकार गठन के बाद से कभी भी पार्टी नेतृत्व के साथ सार्वजनिक मंच पर नहीं दिखे हैं, जिससे पार्टी के भीतर ऑल-इज-वेल नहीं होने के संकेत मिल रहे हैं।
ताजा घटनाक्रम मधुबनी का है, जहां नवनियुक्त पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अपने दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। सोमवार को उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा की, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम से स्थानीय RLM MLA माधव आनंद की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले 25 दिसंबर को पटना में आयोजित लिट्टी-चोखा पार्टी से भी माधव आनंद दूर रहे थे और उसी दौरान उन्होंने दिल्ली जाकर भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की तस्वीरें साझा की थीं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बयानों से डैमेज कंट्रोल की कोशिश या बढ़ रही है दूरियां?
जब मंत्री दीपक प्रकाश से स्थानीय विधायक की अनुपस्थिति के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा, “विधायक जी हमारे कार्यक्रम में क्यों नहीं आए, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। हो सकता है कि वे कहीं और व्यस्त हों।” उन्होंने पार्टी के अंदरूनी कलह और विधायकों की नाराजगी से जुड़े सवालों को टाल दिया और कहा कि इस पर पार्टी के शीर्ष नेता ही जवाब दे सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, विधायक माधव आनंद ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि पटना में पर्यावरण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक होने के कारण वह मंत्री के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मनमुटाव से इनकार किया है। हालांकि, सियासी गलियारों में इन दलीलों को सिर्फ डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी बीच, विधायक माधव आनंद ने 13 जनवरी को मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर अपने कार्यालय पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया है, जिसे उनके शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।

