
UPSC Exam: सपनों की उड़ान भरने के लिए संघर्षों की अग्नि से गुजरना पड़ता है, और जब सफलता मिलती है, तो वह न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरे क्षेत्र को आलोकित कर देती है। कुछ ऐसी ही कहानी है मधुबनी की बेटी श्रेया झा की, जिन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार और पैतृक भूमि का मान बढ़ाया है।
UPSC Exam में मधुबनी की श्रेया झा ने लहराया परचम, 357वीं रैंक हासिल कर किया नाम रोशन
श्रेया झा की UPSC Exam की प्रेरक यात्रा
UPSC Exam: सपनों की उड़ान भरने के लिए संघर्षों की अग्नि से गुजरना पड़ता है, और जब सफलता मिलती है, तो वह न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरे क्षेत्र को आलोकित कर देती है। कुछ ऐसी ही कहानी है मधुबनी की बेटी श्रेया झा की, जिन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार और पैतृक भूमि का मान बढ़ाया है। दयालपुर गांव से निकलकर, श्रेया ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 357वीं रैंक प्राप्त कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। उनकी सफलता की खबर मिलते ही मधुबनी जिले के झंझारपुर से लेकर कलुआही प्रखंड के हरिपुर डीह गांव तक खुशी का माहौल बन गया।
श्रेया के पिता, अभय कुमार दीपक, एक्सिस बैंक में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में नोएडा में रह रहे हैं। उनकी माता चेतना झा एक गृहणी हैं, जिन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई और सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दो बहनों में बड़ी श्रेया की छोटी बहन लावण्या झा भी लॉ ग्रेजुएट हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा का माहौल उनके घर में शुरू से ही रहा है।
श्रेया झा की सफलता में उनके नाना-नानी का भी बड़ा योगदान रहा है। नाना प्रो. उग्रदेव झा ललित नारायण जनता महाविद्यालय से सेवानिवृत्त अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं, जबकि नानी मंजू झा एमपीटी उच्च विद्यालय, झंझारपुर से सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। प्रो. झा मूल रूप से कलुआही प्रखंड के हरिपुर डीह टोल के निवासी हैं। शुरुआती वर्षों में श्रेया ने झंझारपुर के पार्वती लक्ष्मी उच्च विद्यालय में अपनी नानी के साथ रहकर पढ़ाई की। यह वह समय था जब उनमें शिक्षा के प्रति गहरी रुचि जागृत हुई।
उच्च शिक्षा और सिविल सेवा का लक्ष्य
अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, श्रेया ने धनबाद के माउंट कारमेल विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा शानदार अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके उपरांत, उन्होंने कानून के क्षेत्र में स्नातक की डिग्री हासिल की, जो सिविल सेवा परीक्षा के लिए उनकी नींव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। श्रेया झा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यूपीएससी परीक्षा में उनकी सफलता की खबर जैसे ही मधुबनी जिले के झंझारपुर और कलुआही प्रखंड के हरिपुर डीह गांव तक पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ गई। झंझारपुर स्थित उनके नाना-नानी के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय लोगों और परिजनों ने श्रेया की इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। यह केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
श्रेया की यह यात्रा उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो प्रशासनिक सेवाओं में अपना करियर बनाने का सपना देखते हैं। उनकी मेहनत, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण का यह सुखद परिणाम है। श्रेया झा की सफलता उन सभी के लिए एक मार्गदर्शक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





