



Viksit Bharat G RAM G Act: मनरेगा का चैप्टर क्लोज, अब नए कानून से बदलेगी गांवों की तस्वीर! केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत की तकदीर बदलने वाला जो नया दांव चला है, उसकी गूंज अब मधुबनी तक पहुंच गई है। मधुबनी में बुधवार को उप विकास आयुक्त सुमन प्रसाद साह ने इस नए अधिनियम की पूरी रूपरेखा मीडिया के सामने रखी। उन्होंने बताया कि यह कानून पूर्ववर्ती मनरेगा योजना की जगह लेगा और इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को अधिक सशक्त, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाना है।
Viksit Bharat G RAM G Act के क्या हैं नए नियम?
उप विकास आयुक्त सुमन प्रसाद साह ने बताया कि इस नए अधिनियम के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों की जगह 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की कानूनी गारंटी प्रदान की जाएगी। इसका सीधा असर ग्रामीण आय सुरक्षा पर पड़ेगा और गांवों से होने वाले पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है। यह कदम ग्रामीण रोजगार को एक नई दिशा देगा। खेती के व्यस्त मौसम को ध्यान में रखते हुए, साल में अधिकतम 60 दिनों का कार्य-विराम भी रखा जा सकेगा, ताकि किसानों को असुविधा न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शेष अवधि में निर्धारित रोजगार दिवस सुनिश्चित किए जाएंगे।
डिजिटल निगरानी और समय पर भुगतान पर जोर
इस योजना में डिजिटल पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। अब बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीपीएस आधारित निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऑडिट जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। इससे भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर लगाम लगेगी। मजदूरों के भुगतान को लेकर भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या अधिकतम 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। अगर किसी कारणवश निर्धारित समय में काम उपलब्ध नहीं कराया जा सका, तो सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। केंद्र और राज्य के बीच योजना का वित्तीय प्रावधान 60:40 के अनुपात में होगा, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है।
व्यक्तिगत और सार्वजनिक, दोनों तरह के कार्य होंगे शामिल
अधिनियम के तहत व्यक्तिगत और सार्वजनिक, दोनों प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है, ताकि ग्रामीण अवसंरचना का समग्र विकास हो सके। व्यक्तिगत श्रेणी में पौधरोपण, वर्मी-कम्पोस्ट यूनिट, बायोगैस संयंत्र, पशुपालन के लिए शेड और निजी तालाब जैसे कार्य शामिल हैं। वहीं, सार्वजनिक श्रेणी में चेक डैम, खेल के मैदान, आंगनबाड़ी केंद्र, जल निकासी योजना और ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। मधुबनी जिले में सभी नई योजनाओं की एंट्री ‘युक्त धारा’ और ‘नरेगा सॉफ्ट’ पोर्टल पर अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही, पहले से चल रही योजनाओं को 60 दिनों के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उप विकास आयुक्त ने कहा कि यह अधिनियम ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के साथ-साथ रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा।





