बिहार की राजनीति में अक्सर नेताओं के औचक दौरे सुर्खियां बटोरते हैं। ऐसा ही एक वाकया सामने आया जब एक कैबिनेट मंत्री अचानक सरकारी अस्पताल जा पहुंचीं। अस्पताल पहुंचते ही जो नजारा दिखा, उसने सिर्फ मंत्री को ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया।
पटना से सटे इलाकों में या यूं कहें कि राज्य भर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इसी कड़ी में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। बिहार सरकार में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने हाल ही में एक सरकारी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उनका यह दौरा प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलने वाला साबित हुआ।
मंत्री लेशी सिंह जब अस्पताल पहुंचीं तो वहां का नजारा देख वह हैरान रह गईं। मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की बात तो दूर, अस्पताल में डॉक्टर और नर्स अपने ड्यूटी पॉइंट से नदारद मिले। वार्डों में साफ-सफाई का अभाव और दवाओं की उपलब्धता पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए। यह देखकर मंत्री का पारा चढ़ गया।
लापरवाही का आलम: ड्यूटी से गायब मिले स्वास्थ्यकर्मी
अस्पताल की इस बदहाली और स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति पर मंत्री लेशी सिंह ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। मंत्री का यह औचक दौरा कहीं न कहीं इस बात का सूचक है कि उच्च अधिकारी भी व्यवस्था से असंतुष्ट हैं और सुधार की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं।
मंत्री ने जताई नाराजगी, कार्रवाई के दिए निर्देश
आम जनता के लिए सरकारी अस्पताल ही आखिरी उम्मीद होते हैं, खासकर ग्रामीण और गरीब तबके के लिए। ऐसे में यदि वहां डॉक्टर और नर्स ही उपलब्ध न हों, तो मरीजों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा, यह आसानी से समझा जा सकता है। मंत्री के इस कदम से उम्मीद जगी है कि शायद इस मामले में कुछ ठोस कार्रवाई हो।



