
मनरेगा घोटाला: बिहार के मुंगेर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 13 साल पुराने एक महाघोटाले में आखिरकार कानून के लंबे हाथ पहुंच ही गए। बिना काम के ही लाखों रुपये डकारने वाले एक जूनियर इंजीनियर को पटना से गिरफ्तार कर लिया गया है।
मुंगेर के धरहरा प्रखंड की शिवकुंड पंचायत में हुए इस बड़े घोटाले में वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान एनएच-80 से निषाद टोला तक 4.41 लाख रुपये की लागत से पीसीसी सड़क और नाला निर्माण की योजना स्वीकृत हुई थी। लेकिन हकीकत यह थी कि धरातन पर एक ईंट तक नहीं लगी और न ही कोई गड्ढा खोदा गया। इसके बावजूद, मापी पुस्तिका (MB) भरकर करीब 3.74 लाख रुपये की बड़ी राशि निकाल ली गई।
क्या है पूरा मनरेगा घोटाला?
जांच में पता चला कि गांव में न सड़क बनी, न नाला, और न ही योजना स्थल पर कोई सूचना पट्ट लगाया गया। यह योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई, जबकि सरकारी खजाने की जमकर बंदरबांट की गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस मामले में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था।
13 साल तक रहा फरार, फिर ऐसे हुई गिरफ्तारी
इस मामले में सात आरोपियों ने तो समय रहते कोर्ट से जमानत ले ली थी, लेकिन कनीय अभियंता ओम प्रकाश कुमार पिछले 13 सालों से फरार चल रहा था। वह लगातार कानून को चकमा दे रहा था। मुंगेर कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की। हेमजापुर थाने की पुलिस ने तकनीकी और खुफिया इनपुट के आधार पर पटना के फुलवारी शरीफ स्थित उसके आवास पर छापेमारी की और आखिरकार उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद आरोपित को मुंगेर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। थानाध्यक्ष नीरज कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि फरार जूनियर इंजीनियर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और भ्रष्टाचार करने वालों को एक न एक दिन अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







