

मुजफ्फरपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ सरकारी कामकाज में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर अब प्रशासन ने नकेल कसनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में एक नियोजन पदाधिकारी को अपनी लापरवाही का भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है, जिसकी चर्चा पूरे प्रशासनिक गलियारों में गर्म है।
विभागीय लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
मिली जानकारी के अनुसार, जिले में विभागीय कार्यों में लगातार लापरवाही बरतने के आरोप में एक नियोजन पदाधिकारी का वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उच्चाधिकारियों द्वारा की गई है, जिन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आम जनता से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बताया जा रहा है कि संबंधित पदाधिकारी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और रिपोर्टों को समय पर पूरा करने में विफल रहे थे, जिसके कारण विभाग के कामकाज में अनावश्यक विलंब हो रहा था।
जिलाधिकारी का सख्त रुख
इस मामले पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि सरकार की प्राथमिकता जनहित के कार्यों को समय पर पूरा करना है। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों और पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों के कामकाज पर पैनी नजर रखें। जिलाधिकारी ने यह भी चेताया कि यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर विभागीय कार्य में लापरवाही या शिथिलता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें वेतन स्थगन से लेकर सेवा समाप्ति तक शामिल हो सकता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि कार्य के प्रति जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार की विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने और उनका लाभ आम जनता तक पहुंचाने में अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में, किसी भी प्रकार की हीला-हवाली न केवल विभागीय प्रतिष्ठा को धूमिल करती है, बल्कि विकास कार्यों में भी बाधा उत्पन्न करती है।
भविष्य में भी जारी रहेगी निगरानी
बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने अब सभी विभागों के कामकाज की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। एक विशेष टीम गठित की गई है जो विभिन्न कार्यालयों और परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट की लगातार निगरानी करेगी। इस कदम का उद्देश्य कार्यसंस्कृति में सुधार लाना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी सरकारी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे हों। इस प्रकार की कार्रवाई से कर्मचारियों में भी गंभीरता और जिम्मेदारी की भावना बढ़ने की उम्मीद है।


