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फ़रवरी, 18, 2026
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मुजफ्फरपुर का अनोखा गांव: जहां चमगादड़ नहीं, ‘बादुर बाबा’ रहते हैं, ग्रामीण मानते हैं सुख-समृद्धि का रक्षक

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मुजफ्फरपुर न्यूज़: जहां एक ओर दुनिया भर में चमगादड़ों को अक्सर अशुभ और बीमारियों का वाहक मानकर उनसे खौफ खाया जाता है, वहीं बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक ऐसा गांव है जिसकी कहानी आपको हैरान कर देगी। यहां के ग्रामीण इन निशाचर जीवों को भय की दृष्टि से नहीं, बल्कि श्रद्धा से देखते हैं और उन्हें ‘बादुर बाबा’ कहकर पुकारते हैं। स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि यही ‘बादुर बाबा’ उनके गांव की ढाल, रक्षक और सुख-समृद्धि के प्रतीक हैं। आखिर क्या है इस अनूठी आस्था का रहस्य, जो सदियों से इस गांव की पहचान बनी हुई है?

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इस रहस्यमयी गांव में, चमगादड़ों को न केवल सम्मान दिया जाता है, बल्कि उन्हें ग्राम देवता का दर्जा प्राप्त है। ग्रामीण मानते हैं कि इन चमगादड़ों का वास उनके गांव के लिए सौभाग्य लाता है और किसी भी अनिष्ट से उनकी रक्षा करता है। यह मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है और गांव के हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है।

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बादुर बाबा: एक अनोखी आस्था

सामान्यतः, पूरी दुनिया में चमगादड़ों को अक्सर अंधविश्वास और बीमारियों, विशेषकर कोविड-19 महामारी के बाद, संक्रमण फैलाने वाले जीवों के रूप में देखा जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी इन्हें कई वायरसों का प्राकृतिक वाहक बताया गया है। लेकिन, मुजफ्फरपुर के इस गांव में यह धारणा बिल्कुल विपरीत है। यहां के निवासियों के लिए, चमगादड़ सिर्फ जीव नहीं, बल्कि साक्षात देवता हैं जो उनकी रक्षा करते हैं। उनका मानना है कि जब तक ‘बादुर बाबा’ गांव में हैं, तब तक वे हर संकट से सुरक्षित रहेंगे।

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ग्रामवासियों के अनुसार, ये ‘बादुर बाबा’ उनके खेतों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से बचाते हैं, जिससे उनकी फसलें लहलाती हैं और समृद्धि आती है। इसके अलावा, गांव के लोगों का यह भी मानना है कि ये चमगादड़ किसी भी प्राकृतिक आपदा या महामारी के दौरान गांव को एक अदृश्य सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। यह गहन विश्वास ही है जो उन्हें चमगादड़ों को पूजने के लिए प्रेरित करता है, न कि उनसे डरने के लिए।

विज्ञान और आस्था का अनूठा संगम

इस गांव में चमगादड़ों की मौजूदगी को कभी भी परेशानी का सबब नहीं माना गया, बल्कि इसे एक आशीर्वाद के रूप में देखा जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी चमगादड़ों के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं। यह स्थानीय संस्कृति और परंपरा का एक अविभाज्य हिस्सा बन गया है, जो आधुनिक दुनिया की धारणाओं के बावजूद अपनी पहचान बनाए हुए है। यह सिर्फ एक अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक गहरी आस्था है जो समुदाय को एक साथ बांधे रखती है।

मुजफ्फरपुर का यह गांव वाकई एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है जहां मानव और वन्यजीव के बीच एक असाधारण संबंध विकसित हुआ है। यह दिखाता है कि कैसे स्थानीय मान्यताएं और प्राकृतिक दुनिया के प्रति सम्मान एक समुदाय के जीवन को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं, चाहे दुनिया की आम धारणाएं कुछ भी हों। ‘बादुर बाबा’ की यह कहानी बिहार की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत का एक और दिलचस्प पहलू उजागर करती है।

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