

Bihar Corruption Case: भ्रष्टाचार की इमारतें अक्सर रेत के महल सी होती हैं, जो एक झटके में ढह जाती हैं। मुजफ्फरपुर निगरानी कोर्ट ने बिहार के गन्ना उद्योग विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर ऐसा ही करारा प्रहार किया है, जहां छह भ्रष्ट अधिकारियों को उनकी करतूतों की सजा मिली है।
बिहार भ्रष्टाचार मामला: गन्ना उद्योग विभाग के 6 अधिकारियों को निगरानी कोर्ट ने सुनाई सजा, जानिए पूरा मामला
मुजफ्फरपुर की निगरानी कोर्ट ने गन्ना उद्योग विभाग के तत्कालीन प्रशासन प्रमुख सहित छह लोगों को भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह फैसला बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। निगरानी ब्यूरो द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दोषी पाए गए अधिकारियों में बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड, पटना के तत्कालीन प्रशासन प्रमुख नंद कुमार सिंह, तत्कालीन प्रबंध निदेशक के विशेष सहायक उमेश प्रसाद सिंह, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड की लौरिया इकाई, पश्चिम चंपारण, बेतिया के तत्कालीन सुगर कोषांग लिपिक लालबाबू प्रसाद और सुशील कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन लेखा पदाधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव, और तत्कालीन चीनी बिक्री प्रभारी धीरेन्द्र झा शामिल हैं।
क्या है बिहार भ्रष्टाचार केस का पूरा मामला?
यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) एवं भा॰द॰वि॰ की धारा 467, 468, 471, एवं 120(बी॰) के तहत निगरानी थाना कांड संख्या-07/2000 (विशेष वाद सं-94/2002) से जुड़ा है। वर्ष 1990 के सितंबर माह में बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड, पटना के अंतर्गत लौरिया, पश्चिम चंपारण स्थित चीनी मिल में 997 बोरे चीनी के गबन का आरोप था। अधिकारियों पर अपने पद का भ्रष्ट दुरुपयोग, धोखेबाजी और जालसाजी का आरोप लगा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह गंभीर Sugar Mill Scam तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक सदन कुमार श्रीवास्तव के लिखित प्रतिवेदन के आधार पर दर्ज किया गया था। तत्कालीन अनुसंधानकर्त्ता पुलिस उपाधीक्षक कुमार एकले ने इस मामले में समय पर आरोप-पत्र दायर कर जांच को आगे बढ़ाया। बिहार सरकार की ओर से प्रभारी विशेष लोक अभियोजक कृष्णदेव साह ने प्रभावी ढंग से पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप सभी छह सरकारी पदाधिकारियों को दोषी साबित करने में सफलता मिली।
किन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई और किसे कितनी मिली सजा?
निगरानी कोर्ट ने दोषियों को उनकी भूमिका के आधार पर अलग-अलग सजाएं सुनाई हैं:
- नंद कुमार सिंह: तत्कालीन प्रशासन प्रमुख, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड पटना। इन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) 1988 के तहत दो वर्ष का सश्रम कारावास और 10,000/- (दस हजार) रुपये का अर्थदण्ड। अर्थदण्ड जमा न करने पर एक महीने का साधारण कारावास।
- उमेश प्रसाद सिंह: तत्कालीन प्रबंध निदेशक के विशेष सहायक, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड पटना। इन्हें भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) 1988 के तहत दो वर्ष का सश्रम कारावास और 10,000/- (दस हजार) रुपये का अर्थदण्ड। अर्थदण्ड जमा न करने पर एक महीने का साधारण कारावास।
शेष चार अधिकारियों को तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 25,000/- (पच्चीस हजार) रुपये का अर्थदण्ड दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अर्थदण्ड की राशि जमा न करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा। इन अधिकारियों में शामिल हैं:
- लालबाबू प्रसाद: तत्कालीन सुगर कोषांग लिपिक, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण, बेतिया।
- सुशील कुमार श्रीवास्तव: तत्कालीन सुगर कोषांग लिपिक, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण।
- अजय कुमार श्रीवास्तव: तत्कालीन लेखा पदाधिकारी, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण।
- धीरेन्द्र झा: तत्कालीन चीनी बिक्री प्रभारी, बिहार राज्य सुगर कॉपरेशन लिमिटेड लौरिया इकाई, प॰ चम्पारण।
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यह फैसला दर्शाता है कि सरकारी पदों पर बैठकर जनता के धन का दुरुपयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह Sugar Mill Scam जैसे मामलों में न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता को उजागर करता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ती कार्रवाई: एक साल में सजा का आंकड़ा
वर्ष 2025 में अब तक कुल 30 भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में न्यायालयों द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें से 28 मामलों में दोषसिद्धि की कार्रवाई विशेष न्यायाधीश मो0 रूस्तम, विशेष न्यायालय निगरानी, पटना द्वारा सुनाई गई है। पिछले वर्ष 2024 में कुल 18 मामलों में सजा सुनाई गई थी। इस प्रकार, इस वर्ष न्यायालयों द्वारा अधिक मामलों में सजा सुनाए जाने की कार्रवाई की गई है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचारियों को कानून के शिकंजे से बचना मुश्किल होगा।

