

मुजफ्फरपुर न्यूज़: नगर निगम में एक बार फिर राजनीतिक गहमागहमी तेज हो गई है। हाल ही में एक एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव पर बड़ा बवाल मचा, जिसके बाद जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया। यह पूरा मामला निंदा प्रस्ताव के रुकने और बैठक के अचानक थम जाने से जुड़ा है, जिस पर अब तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
जानकारी के मुताबिक, मुजफ्फरपुर नगर निगम के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के खिलाफ पार्षदों ने निंदा प्रस्ताव पेश किया था। यह प्रस्ताव अधिकारी के कामकाज या किसी खास मामले में उनकी भूमिका को लेकर असंतोष व्यक्त करने के उद्देश्य से लाया गया था। निंदा प्रस्ताव किसी भी सरकारी विभाग या निकाय में अधिकारियों के खिलाफ असंतोष जाहिर करने का एक गंभीर तरीका होता है, जो अक्सर उनके कार्यशैली पर सवाल उठाता है।
अचानक क्यों रोकी गई बैठक?
हालांकि, जैसे ही इस गंभीर प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने वाली थी, अचानक बैठक को बीच में ही रोक दिया गया। सूत्रों की मानें तो बैठक को रोकने का फैसला इस पूरे मामले को शांत करने और निंदा प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लिया गया। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव पर कोई मतदान नहीं हो सका और अंततः मामला वहीं थम गया, जिससे यह प्रस्ताव निष्प्रभावी हो गया।
नगर निगम के गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं कि आखिर क्यों इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को बीच में ही रोक दिया गया और इसकी बजाय बैठक को स्थगित करना क्यों उचित समझा गया। क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव था या फिर अधिकारी को बचाने का प्रयास? इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन घटनाक्रम ने निगम की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

