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फ़रवरी, 17, 2026
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Muzaffarpur में EOU की बड़ी कार्रवाई, DSP – थानाध्यक्ष समेत 4 पर गिरी ग़ाज़, चौंकाने वाला है मामला

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Muzaffarpur: कहते हैं रक्षक ही जब भक्षक बन जाए तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? बिहार के मुजफ्फरपुर में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां वर्दी की हनक में चूर अधिकारियों ने ही पटना हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा दिया। अब इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बड़ी कार्रवाई की है।

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Bihar Police FIR: क्या है पूरा मामला और क्यों हुई EOU की एंट्री?

आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पटना हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, एक डीएसपी, थानाध्यक्ष और एक दारोगा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इन सभी आरोपी पदाधिकारियों पर आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए एक जब्त स्कॉर्पियो गाड़ी को अवैध रूप से नीलाम करने का गंभीर आरोप है।

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प्राथमिकी के अनुसार, यह मामला मुजफ्फरपुर के मुशहरी निवासी सुशील कुमार सिंह से जुड़ा है। साल 2020 में उनकी स्कॉर्पियो कार को सकरा थाने की पुलिस ने जब्त कर लिया था। पुलिस ने उस वक्त गाड़ी से पांच बोतल विदेशी शराब की बरामदगी दिखाई थी।

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न्यायालय के आदेश की सरेआम अवहेलना

शराब मामले से बरी होने के बाद, पीड़ित सुशील कुमार सिंह ने अपनी गाड़ी को मुक्त कराने के लिए विशेष न्यायालय में एक याचिका दायर की। न्यायालय ने उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए सकरा थाना प्रभारी को तत्काल गाड़ी मुक्त करने का स्पष्ट आदेश दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बावजूद, थाना प्रभारी ने आदेश का पालन करने में टालमटोल का रवैया अपनाया और पीड़ित को डीएसपी पूर्वी, मुजफ्फरपुर के पास भेज दिया। डीएसपी ने भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल किया।

अधिकारियों के इस रवैये से परेशान होकर पीड़ित ने एक बार फिर न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इस याचिका के आधार पर, कोर्ट ने थानाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। काफी समय बीत जाने के बाद थानाध्यक्ष ने न्यायालय को सूचित किया कि उक्त गाड़ी को मार्च 2023 में ही राज्यसात करते हुए नीलाम कर दिया गया है। यह पूरा मामला अवैध वाहन नीलामी से जुड़ा हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

हाईकोर्ट ने दिए EOU जांच के आदेश

निचली अदालत से राहत न मिलने पर पीड़ित ने हाईकोर्ट के आदेश पर उत्पाद विभाग में अपील और रिवीजन याचिकाएं भी दाखिल कीं, लेकिन वहां भी उनकी दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गईं। इसके बाद, उन्होंने पटना हाईकोर्ट में एक रिट याचिका (सीडब्लूजेसी) दायर की। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए आर्थिक अपराध इकाई को सीधे तौर पर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां यहां क्लिक करें। EOU की इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

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