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फ़रवरी, 18, 2026
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सरकारी जमीनों पर कब्जे के खिलाफ बड़ा अभियान: अब हर इंच का होगा हिसाब!

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मुजफ्फरपुर समाचार: सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जेदारों की अब खैर नहीं! प्रशासन ने अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कमर कस ली है, जिसके तहत जल्द ही बड़े पैमाने पर भूमि की मापी और जमाबंदी का काम शुरू होने वाला है। आखिर क्या है पूरा प्लान और कैसे यह कदम सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित करेगा?

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सरकारी जमीनों पर बढ़ता अतिक्रमण: एक गंभीर चुनौती

भारत में, खासकर बिहार में, सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है। यह न केवल सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान पहुँचाता है, बल्कि विभिन्न विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भी बाधा उत्पन्न करता है। इन अवैध कब्जों के कारण आम जनता को भी कई तरह की बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।

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अक्सर, इन सरकारी भूमियों पर अस्थायी या स्थायी निर्माण कर लिए जाते हैं, जिससे उन्हें खाली कराना एक जटिल और समय लेने वाली कानूनी प्रक्रिया बन जाती है। स्थानीय प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती रही है कि कैसे इन अवैध कब्जों को रोका जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी भूमि का उपयोग केवल सार्वजनिक हित में ही हो।

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मापी और जमाबंदी: क्यों हैं ये महत्वपूर्ण कदम?

इस गंभीर चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए, मुजफ्फरपुर में प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और निर्णायक पहल की है। सरकारी भूमि की सटीक पैमाइश (मापी) और जमाबंदी (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) की प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

ये दोनों प्रक्रियाएं सरकारी भूमि प्रबंधन की आधारशिला हैं:

  • भूमि की मापी (सर्वेक्षण): यह किसी भी जमीन के वास्तविक क्षेत्रफल और उसकी सीमाओं को सटीक रूप से निर्धारित करने की प्रक्रिया है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट रूप से स्थापित किया जा सकता है कि कौन सी भूमि सरकारी है और कौन सी निजी।
  • जमाबंदी (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स): यह भूमि के मालिकाना हक का एक आधिकारिक और कानूनी रिकॉर्ड होता है। इसमें जमीन के मालिक का नाम, जमीन का प्रकार और अन्य महत्वपूर्ण विवरण विधिवत दर्ज होते हैं। सरकारी जमीनों के मामले में, यह सुनिश्चित करता है कि उनका रिकॉर्ड पूरी तरह से सरकार के नाम पर हो और किसी भी प्रकार के अवैध दावे को रोका जा सके।
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ये दोनों कदम एक साथ मिलकर सरकारी जमीनों की पहचान करने, उनकी सीमाओं को सुरक्षित करने और किसी भी नए या मौजूदा अवैध कब्जे को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। एक बार सटीक और अद्यतन भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद, किसी भी प्रकार के अतिक्रमण पर त्वरित और कानूनी कार्रवाई करना प्रशासन के लिए कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

अभियान का उद्देश्य और अपेक्षित परिणाम

इस महत्वाकांक्षी अभियान का मुख्य उद्देश्य सभी सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कराना और भविष्य में ऐसे किसी भी अवैध प्रयास को पूरी तरह से हतोत्साहित करना है। प्रशासन का दृढ़ विश्वास है कि पारदर्शी और सटीक भूमि रिकॉर्ड से न केवल भूमि संबंधी कानूनी विवादों में कमी आएगी, बल्कि जिले में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भी पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो सकेगी।

इसके अतिरिक्त, इस पहल से सार्वजनिक स्थलों, जैसे कि पार्कों, खेल के मैदानों, सड़कों और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आरक्षित जमीनों को भी सुरक्षित किया जा सकेगा। यह कदम स्थानीय नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाओं और एक संगठित तथा टिकाऊ शहरी व ग्रामीण विकास में सहायक सिद्ध होगा।

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आगे की रणनीति और जनता से अपील

इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में स्थानीय राजस्व विभाग, अंचल कार्यालय और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी सक्रिय रूप से शामिल होंगे। इस कार्य के लिए जल्द ही एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी और इसे एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि परिणामों को जल्द से जल्द देखा जा सके।

प्रशासन ने आम जनता से भी हृदय से अपील की है कि वे सरकारी जमीनों पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे से बचें और इस जनहितैषी अभियान में अपना पूर्ण सहयोग दें। नागरिकों को यह भी सलाह दी गई है कि किसी भी संदिग्ध अतिक्रमण गतिविधि या जानकारी को तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

यह पहल मुजफ्फरपुर में सरकारी भूमि प्रबंधन को मजबूत करने और सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है। उम्मीद है कि यह अभियान सरकारी भूमि के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने में एक मील का पत्थर साबित होगा और जिले के विकास को गति प्रदान करेगा।

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