

मुजफ्फरपुर न्यूज़: जब पूरी दुनिया चमगादड़ों को महामारी और अशुभ का प्रतीक मानकर उनसे दूरी बनाए रखती है, ठीक उसी वक्त बिहार में एक ऐसा भी गांव है, जहां इन चमगादड़ों को देवता के समान पूजा जाता है। यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था है, जहां गांव के लोग इन्हें ‘बादुर बाबा’ कहकर पुकारते हैं और मानते हैं कि ये ही उनकी रक्षा करते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आखिर क्या है इस अद्भुत गांव की कहानी और क्यों इतने खास हैं यहां के चमगादड़?
बादुर बाबा की अनोखी महिमा
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित एक छोटा सा गांव, जहां चमगादड़ों को लेकर एक बेहद अनूठी मान्यता प्रचलित है। यहां के निवासियों के लिए चमगादड़ केवल एक जीव नहीं, बल्कि ‘ग्राम देवता’ का दर्जा रखते हैं। ग्रामीण सदियों से इन चमगादड़ों को ‘बादुर बाबा’ कहकर संबोधित करते आए हैं और उनकी उपस्थिति को अपने गांव की खुशहाली और सुरक्षा का प्रतीक मानते हैं। यह विश्वास पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा है, जिसने इस गांव को एक रहस्यमय पहचान दी है।
रक्षक और समृद्धि के प्रतीक
स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि ये चमगादड़ गांव को हर तरह की विपदाओं से बचाते हैं। चाहे प्राकृतिक आपदा हो या कोई बाहरी खतरा, ग्रामीणों का मानना है कि ‘बादुर बाबा’ एक अदृश्य ढाल की तरह उनकी रक्षा करते हैं। इसके साथ ही, इन्हें सुख-समृद्धि का सूचक भी माना जाता है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि जब तक ये चमगादड़ यहां मौजूद हैं, गांव में कभी कोई बड़ी समस्या नहीं आती और खुशहाली बनी रहती है।
जब दुनिया डरती है, यहां होती है पूजा
यह तथ्य और भी दिलचस्प हो जाता है जब हम देखते हैं कि वैश्विक स्तर पर चमगादड़ों को कई बीमारियों का वाहक और एक भयावह जीव के तौर पर देखा जाता है। कई संस्कृतियों में इन्हें अशुभ भी माना जाता है। लेकिन, इस बिहारी गांव की सोच इसके ठीक विपरीत है। यहां चमगादड़ों को सम्मान और आदर की दृष्टि से देखा जाता है, उन्हें कभी कोई हानि नहीं पहुंचाई जाती और उनकी उपस्थिति को ईश्वरीय वरदान माना जाता है। यह अपने आप में एक अनूठा उदाहरण है कि कैसे स्थानीय परंपराएं और विश्वास वैश्विक धारणाओं से परे जाकर अपनी जगह बनाए रखते हैं।


