

मुजफ्फरपुर समाचार: जल आपूर्ति योजनाओं में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर सरकार ने कड़ा प्रहार किया है। क्या है यह पूरा मामला और किन पर गिरी है गाज? एक फैसले ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
बिहार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के मंत्री संजय कुमार सिंह ने मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र में जल आपूर्ति योजनाओं की समीक्षा के दौरान सख्त रुख अपनाया है। विभाग की नई ‘रैंकिंग प्रणाली’ में फिसड्डी साबित होने वाले 40 अभियंताओं का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। साथ ही, मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जलापूर्ति योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही सामने आने पर संबंधित ठेकेदारों को डिबार या ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मंत्री संजय कुमार सिंह ने शुक्रवार को मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 54 अनुमंडलों की विस्तृत समीक्षा बैठक की, जिसके बाद यह बड़ा फैसला लिया गया।
अधिकारियों पर क्यों गिरी गाज?
विभागीय अधिकारियों के कामकाज के मूल्यांकन के लिए पीएचईडी द्वारा हाल ही में एक नई और पारदर्शी ‘रैंकिंग प्रणाली’ विकसित की गई है। इस प्रणाली के तहत किए गए मूल्यांकन में जो अधिकारी सबसे निचले पायदान पर पाए गए, उन पर त्वरित कार्रवाई की गई है। मंत्री के निर्देश पर 'बॉटम-5' कार्यपालक अभियंताओं, 'बॉटम-10' सहायक अभियंताओं और 'बॉटम-25' कनीय अभियंताओं का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। इन सभी से स्पष्टीकरण मांगते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का भी आदेश जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि काम में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ठेकेदारों को सख्त संदेश: लापरवाही पर होगा ब्लैकलिस्ट
समीक्षा बैठक में मंत्री संजय कुमार सिंह ने अधिकारियों और संवेदकों (ठेकेदारों) को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने दोहराया कि राज्य के हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार का सर्वोच्च संकल्प है। उन्होंने कहा कि यदि संवेदकों द्वारा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में जरा सी भी लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता पाया जाता है, तो उन पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए। मंत्री ने निर्देश दिया कि ऐसे लापरवाह संवेदकों को बिना किसी देरी के तुरंत डिबार या ब्लैकलिस्ट किया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी ठेकेदार ऐसी गलती न करे।
शिकायतों के निपटारे में ढिलाई बर्दाश्त नहीं
बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र में केंद्रीय शिकायत निवारण कक्ष (CGRC पोर्टल) पर कुल 20,451 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 19,278 का सफलतापूर्वक निपटारा किया जा चुका है। मंत्री ने शेष बचे मामलों और नई प्राप्त होने वाली शिकायतों को लेकर अत्यंत सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। शिकायत निवारण में देरी को गंभीर कदाचार माना जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हर घर नल का जल: छूटे टोलों तक पहुंचाने की कवायद
विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल ने बैठक में जानकारी दी कि वर्तमान में मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र में कुल 51,699 जलापूर्ति योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पंचायती राज विभाग से जो योजनाएं पीएचईडी को हस्तांतरित की गई हैं और जिन टोलों या ग्रामीण इलाकों में अभी तक 'नल का जल' नहीं पहुंचा है, वहां टेंडर प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसका उद्देश्य 'हर घर नल का जल' योजना का 100% आच्छादन सुनिश्चित करना है, ताकि कोई भी घर शुद्ध पेयजल से वंचित न रहे।
तकनीकी सुधार और बेहतर कार्य को सम्मान
समीक्षा बैठक में जलापूर्ति योजनाओं में आधुनिक तकनीक, जैसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के एकीकरण, 'ज़ीरो ऑफिस डे' निरीक्षण प्रणाली को मजबूत करने और विद्युत भुगतान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि जहां एक ओर कामचोर और लापरवाह अधिकारियों पर लगातार कार्रवाई हो रही है (पहले भी 10 अभियंताओं पर कार्रवाई की गई थी), वहीं दूसरी ओर अच्छा और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित और सम्मानित भी किया जाएगा। यह नीति विभाग में जवाबदेही और प्रदर्शन-आधारित संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अपनाई जा रही है।


