

Muzaffurpur Child Trafficking: जीवन की रेलगाड़ी में बेहतर भविष्य की तलाश में निकले बच्चों को कब दलालों की अंधेरी सुरंग निगल लेती है, इसका पता भी नहीं चलता। मुजफ्फरपुर जंक्शन पर एक ऐसी ही कोशिश नाकाम की गई, जब कर्मभूमि एक्सप्रेस से 19 मासूमों को बाल तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया।
बाल तस्करी: कर्मभूमि एक्सप्रेस से 19 बच्चे मुक्त, 6 तस्कर गिरफ्तार :Muzaffurpur Child Trafficking
बाल तस्करी के इस जघन्य अपराध पर बड़ा प्रहार
न्यूजलपाईगुड़ी से अमृतसर जा रही 12407 कर्मभूमि एक्सप्रेस में आरपीएफ, जीआरपी, सीआईबी और बचपन बचाओ आंदोलन की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 19 बच्चों को मुक्त कराया है। इस अभियान में बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जा रहे छह बाल तस्करों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। ये सभी बच्चे 12 से 16 वर्ष की आयु के थे, जिन्हें अंबाला, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और सहारनपुर जैसे शहरों में ले जाकर ईंट-भट्ठा, आलू की खुदाई और टाइल्स लगाने जैसे खतरनाक और गैर-कानूनी कामों में धकेलने की योजना थी। यह एक गंभीर **बाल मजदूरी** का मामला था, जिस पर समय रहते अंकुश लगा दिया गया।
आरपीएफ इंस्पेक्टर मनीष कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि बच्चों की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही उन्होंने जीआरपी और सीआईबी के साथ मिलकर एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त ट्रेन में सघन छापेमारी की। ट्रेन की पूरी छानबीन के बाद सभी छह दलालों को मौके से ही धर दबोचा गया। गिरफ्तार किए गए तस्करों को बाद में जीआरपी के हवाले कर दिया गया है, जहां उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मुक्त कराए गए बच्चों में से अधिकांश बिहार और पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं, जिन्हें बेहतर भविष्य के सपने दिखाकर दलाल अपने चंगुल में फंसा लेते हैं। ये मासूम अक्सर गरीबी और अशिक्षा के कारण इन तस्करों के झांसे में आ जाते हैं और उन्हें अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल दिया जाता है।
- अररिया (बिहार)
- उत्तर दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल)
- खगड़िया (बिहार)
- हेमताबाद (पश्चिम बंगाल)
- मालदा (पश्चिम बंगाल)
गिरफ्तार किए गए बाल तस्करों की पहचान भी कर ली गई है, जिन्हें न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया है। ये सभी अलग-अलग जिलों के निवासी हैं और इस गोरखधंधे में लिप्त थे।
- मिथिलेश कुमार मंडल, पिता कैलाश मंडल (अठगामा गांव, किशनपुर थाना, मधेपुरा)
- नितीश मांझी, पिता बोनू मांझी (बेला गांव, गंगौर थाना, खगड़िया)
- मो. अशरफ (सिलामपुर, कटिहार थाना, कटिहार)
- अफसर आलम (बबनगामा, रायगंज थाना, रायगंज)
- तनवीर आलम (शिकारपुर दालकोला गांव, चकलिया थाना, उत्तर दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल)
- शहीदुल हक (सोइदुर गांव, कर्मदेही थाना, उत्तर दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल)
बचाए गए बच्चों का भविष्य और तस्करों का अंजाम
इस छापामार दल में आरपीएफ के एसआई शेखर सुमन, संजय पासवान, भूपेंद्र कुमार तिवारी, आरक्षी राम ईश्वर कुमार और आरक्षी एलबी खान, समस्तीपुर आरपीएफ से आकाश रंजन कुमार और प्रधान आरक्षी संतोष कुमार झा, एसआईटी त्रिलोकी राय, रेल थानाध्यक्ष रंजीत कुमार, निर्देश के कर्मचारी अजय कुमार राय और बचपन बचाओ आंदोलन, समस्तीपुर के सहायक परियोजना पदाधिकारी शिव पूजन कुमार जैसे महत्वपूर्ण सदस्य शामिल थे। इनकी सूझबूझ और संयुक्त प्रयास से 19 मासूमों को **बाल मजदूरी** के दलदल में धकेलने से बचाया जा सका।
इन बच्चों को अब उचित देखभाल और पुनर्वास प्रदान किया जाएगा ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। बाल तस्करी एक ऐसा अपराध है जो समाज की नींव को खोखला करता है और इन मासूमों के भविष्य को अंधकारमय बना देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसे अभियानों से न केवल बच्चों को बचाया जाता है, बल्कि समाज में इस तरह के अपराधों के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है और अपराधियों को एक कड़ा संदेश मिलता है। उम्मीद है कि इन गिरफ्तारियों से बाल तस्करी के नेटवर्क पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

