

मुजफ्फरपुर समाचार: शहर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बड़े अधिकारी के रवैये को लेकर सरगर्मी तेज है। पार्षदों का गुस्सा सातवें आसमान पर है और बात सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक नहीं, बल्कि सीधे कार्रवाई की दहलीज तक पहुंच गई है। आखिर क्या हुआ जो जनप्रतिनिधियों को इतना सख्त कदम उठाना पड़ा?
कार्यपालक अभियंता पर पार्षदों का फूटा गुस्सा
मुजफ्फरपुर नगर निगम में इन दिनों एक कार्यपालक अभियंता के खिलाफ पार्षदों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि अभियंता के कथित अभद्र व्यवहार के कारण कई पार्षद बेहद नाराज हैं। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और निगम की बैठकों में यह प्रमुख मुद्दा बन गया है। पार्षदों का कहना है कि वे जनहित के कार्यों को लेकर अधिकारी से बात करने जाते हैं, लेकिन उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाता।
बदसलूकी बनी विवाद की जड़
मिली जानकारी के अनुसार, पार्षदों ने कार्यपालक अभियंता पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। यह आरोप कई मौकों पर उनके व्यवहार को लेकर लगे हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। पार्षदों का कहना है कि एक सार्वजनिक पद पर बैठे अधिकारी का व्यवहार जनता के प्रतिनिधियों के प्रति सम्मानजनक होना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके विपरीत है। इस रवैये से नाराज पार्षदों ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है।
निंदा प्रस्ताव और सेवा वापसी की तैयारी
पार्षदों के समूह ने अब इस मामले में कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, कार्यपालक अभियंता के कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही, उनकी सेवा वापस करने के संबंध में भी कदम उठाए जा सकते हैं। पार्षदों का मानना है कि ऐसे अधिकारी को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं, जो जनप्रतिनिधियों और उनके माध्यम से जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन हो। यह कदम यह दर्शाता है कि पार्षद इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं।
आगे क्या होगा?
पार्षदों की इस एकजुटता और कड़े रुख के बाद नगर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। क्या कार्यपालक अभियंता के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित होगा? क्या उनकी सेवा वापस ली जाएगी? या फिर कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने नगर निगम के भीतर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।




