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फ़रवरी, 18, 2026
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मुजफ्फरपुर: शिक्षा के अधिकार पर मिली महत्वपूर्ण जानकारी, जानिए बच्चों के भविष्य से जुड़ी हर बात

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मुजफ्फरपुर: क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे का भविष्य किस कानून से सुरक्षित है? एक ऐसी जानकारी जो हर माता-पिता और नागरिक को होनी चाहिए, अब सामने आई है। शिक्षा के अधिकार पर मिली ये अहम सूचनाएँ आपके बच्चों के उज्जवल भविष्य की नींव रख सकती हैं, तो आखिर क्या है यह अधिकार और क्यों जानना है इसे इतना ज़रूरी?

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हाल ही में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने वाले इस कानून के विभिन्न पहलुओं से लोगों को अवगत कराना था। जानकारी देने का मुख्य बिंदु यह था कि कैसे यह अधिनियम देश के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर प्रदान करता है, जिससे कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

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शिक्षा का अधिकार अधिनियम क्या है?

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act, 2009) भारत में 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि आर्थिक या सामाजिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना, हर बच्चे को शिक्षा का मौलिक अधिकार मिले। यह केवल स्कूल भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित सीखने का माहौल भी प्रदान करता है। इस अधिनियम का मुख्य लक्ष्य शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाना और समाज में समानता को बढ़ावा देना है।

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इस अधिनियम के तहत, स्कूलों को 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। इसका लक्ष्य समाज के हर तबके के बच्चों को समान शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके अतिरिक्त, यह बच्चों को बिना किसी भेदभाव के दाखिला देने, उनकी आयु के अनुसार उचित कक्षा में प्रवेश देने और बिना किसी शुल्क के शिक्षा प्रदान करने पर जोर देता है, ताकि किसी भी बच्चे को शिक्षा के लिए आर्थिक बाधाओं का सामना न करना पड़े।

माता-पिता और समाज की भूमिका

अधिनियम के सफल कार्यान्वयन के लिए माता-पिता और समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों और आस-पड़ोस के बच्चों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराए और उन्हें स्कूल भेजे। जानकारी के अनुसार, बच्चों को स्कूल भेजने से न केवल उनका व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण में भी सहायक होता है। शिक्षित नागरिक ही एक मजबूत और प्रगतिशील समाज की नींव रखते हैं।

दी गई जानकारी ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक बदलाव का माध्यम है। यह बच्चों को सशक्त बनाने और उन्हें उज्जवल भविष्य की ओर ले जाने का एक शक्तिशाली उपकरण है। सभी संबंधित पक्षों को इस कानून के प्रावधानों को समझना और उनका लाभ उठाना चाहिए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित न रह जाए और सभी को समान अवसर मिल सकें।

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