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फ़रवरी, 17, 2026
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मुजफ्फरपुर सुसाइड: 4 लोगों की मौत, अधिकारियों की ‘कछुआ चाल’ पर सवाल

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Muzaffarpur Suicide: जीवन जब बोझ बन जाए, और सरकारी तंत्र की सुस्ती मौत का रास्ता दिखा दे, तो एक पूरा परिवार बिखर जाता है। मुजफ्फरपुर की धरती पर हुई यह हृदयविदारक घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम पर एक गहरा प्रश्नचिह्न है।

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मुजफ्फरपुर सुसाइड: 4 लोगों की मौत, अधिकारियों की ‘कछुआ चाल’ पर सवाल

मुजफ्फरपुर सुसाइड: प्रखंड कार्यालय की बड़ी लापरवाही उजागर

मुजफ्फरपुर में चार लोगों की आत्महत्या के हृदयविदारक मामले (Muzaffarpur Suicide) में प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों की घोर लापरवाही सामने आई है। घटना स्थल से महज 4 किलोमीटर की दूरी तय करने में अधिकारियों को 6 घंटे लग गए। यह घटना देर रात की है, जबकि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी ‘साहब’ पीड़ित परिवार के पास दोपहर 12 बजे पहुंचे। यह अपने आप में ही कई सवाल खड़े करता है।

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देर रात मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत रूपन पट्टी मथुरापुर पंचायत के नवलपुर मिश्रौलिया गांव के वार्ड संख्या चार निवासी अमरनाथ राम ने अपने पांचों बच्चों को घर में लगे फंदे पर लटकाने के बाद खुद भी झूल गए। इस भयावह घटना में अमरनाथ राम और उनकी तीन बेटियों की मौत हो गई। हालांकि, उनके दो मासूम बेटे चमत्कारिक रूप से बच गए। इस घटना की सूचना जैसे ही आस-पास के लोगों को मिली, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

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मामले की जानकारी मिलते ही सकरा थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। घटना की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी ईस्ट टू मनोज कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार और तिरहुत रेंज के डीआईजी जयंतकांत समेत पुलिस महकमे के तमाम बड़े अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और गहन जांच शुरू की। लेकिन, सकरा प्रखंड कार्यालय, जो घटनास्थल से महज चार किलोमीटर की दूरी पर है, वहां से प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचलाधिकारी (CO) को पहुंचने में दोपहर के 12 बज गए। इस प्रशासनिक लापरवाही ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

दो अनाथ बच्चों का भविष्य और सरकारी जिम्मेदारी

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक परिवार में चार लोगों की मौत के बाद जो दो मासूम बच्चे इस हादसे में बच गए हैं, उनका क्या होगा? उनकी मां की पहले ही मौत हो चुकी है, और अब पिता व तीन बहनों का साया भी उनके सिर से उठ गया है। ऐसे में जिला प्रशासन का यह नैतिक और कानूनी दायित्व बनता है कि वह तत्काल मौके पर पहुंच कर पीड़ित परिवार की सुध ले और सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली तत्काल सहायता उन्हें मुहैया कराए।

साथ ही, जो दो मासूम बच्चे इस वीभत्स हादसे में बच गए हैं, उनके भरण-पोषण और भविष्य की उचित व्यवस्था की जाए। जब अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचने में ही दोपहर के 12 बज गए, तो यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि वे पीड़ित परिवार की सही से सुध ले पाएंगे और उन्हें न्याय मिल पाएगा? यह घटना दर्शाती है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक लापरवाही के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

यह समय है कि प्रशासन सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज न कराए, बल्कि वास्तविक धरातल पर पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान करे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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