
LPG Cylinder: सरकार के दावों और हकीकत के बीच की खाई अब जनता के किचन तक पहुंच गई है, जहां चूल्हा तो है पर आग जलाने का सामान नहीं। मुजफ्फरपुर में हालात इस कदर बिगड़े कि लोग खाली सिलेंडर लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए।
मुजफ्फरपुर जिले के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह का नजारा हैरान करने वाला था। दामोदर गैस एजेंसी के परेशान उपभोक्ता अपने खाली सिलेंडर लेकर सड़कों पर उतर आए और सीधे समाहरणालय पहुंच गए। लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उनका आरोप है कि कई दिनों से बुकिंग कराने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं दिया जा रहा है, जबकि वेंडर खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि वे तीन-चार दिनों से गैस के लिए दर-दर भटक रहे थे, लेकिन हर जगह से उन्हें टालमटोल कर भगा दिया गया।
एक स्थानीय निवासी कमल अग्रवाल ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “जब हम एजेंसी पर जाते हैं तो हम पर जबरन नया गैस पाइप खरीदने का दबाव बनाया जाता है। कहा जाता है कि बिना पाइप खरीदे सिलेंडर नहीं मिलेगा।” यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर डाका है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जरूरतमंदों को रसोई गैस नहीं मिल रही और दूसरी तरफ इसकी अवैध वसूली और कालाबाजारी का खेल चल रहा है।
क्यों बिगड़े LPG Cylinder संकट के हालात?
जब समाहरणालय पर सुनवाई नहीं हुई तो नाराज भीड़ कंपनी बाग रोड स्थित डीएम आवास की ओर बढ़ गई। वहां पहुंचकर लोगों ने सरकार के उन दावों पर सवाल उठाए, जिनमें गैस की कोई कमी न होने की बात कही जा रही है। इस दौरान डीएम आवास की सुरक्षा में तैनात कर्मियों से प्रदर्शनकारियों की तीखी नोंकझोंक भी हुई। मामला बढ़ता देख नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर डीएम कार्यालय और एसडीओ कार्यालय भेजा, जिसके बाद जाकर डीएम आवास के बाहर से भीड़ हटी।
यह संकट सिर्फ मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सरकार भले ही देश में कच्चे तेल और रसोई गैस की कमी न होने का दावा कर रही हो, लेकिन बिहार में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अकेले पटना में व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से प्रतिदिन 500 करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हो रहा है। होटल, रेस्टोरेंट से लेकर कई छोटे-बड़े उद्योग इस संकट की मार झेल रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
सरकारी दावे और जमीनी हकीकत
एक तरफ सरकार एलपीजी उत्पादन में 25 फीसदी वृद्धि का दावा कर रही है और लोगों से घबराकर अतिरिक्त बुकिंग या स्टॉक जमा न करने की अपील कर रही है। वहीं दूसरी ओर, बिहार के कई जिलों में उपभोक्ता एक-एक सिलेंडर के लिए तरस रहे हैं। यह स्थिति प्रशासनिक दावों और आम आदमी की जरूरतों के बीच एक बड़े अंतर को दर्शाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कोई ठोस कदम उठाता है।







