

मुजफ्फरपुर से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। जिस अस्पताल में जिंदगी की उम्मीद लेकर लोग जाते हैं, वहीं एक मरीज की मौत के बाद उसके शव के साथ ऐसा बर्ताव किया गया, जिसकी कल्पना भी रूह कंपा देती है। क्या हुआ उस रात, जब वार्ड से एक शव को घसीटकर सीढ़ियों के नीचे फेंक दिया गया? यह घटना अस्पताल प्रबंधन और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
मामला मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल का है, जहाँ एक मरीज ने इलाज के दौरान वार्ड में दम तोड़ दिया। यह तो नियति का विधान था, लेकिन उसके बाद जो कुछ हुआ, वह बेहद अमानवीय और चौंकाने वाला था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरीज की मौत के उपरांत उसके शव को सम्मानजनक तरीके से हटाने के बजाय, उसे वार्ड से उठाकर सीधे सीढ़ियों के नीचे फेंक दिया गया। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और सार्वजनिक रूप से रोष उत्पन्न कर दिया है।
अमानवीय कृत्य ने झकझोरा
यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा का घोर उल्लंघन है। भारतीय संस्कृति और नैतिकता में, मृत्यु के बाद भी व्यक्ति के सम्मान का विशेष महत्व होता है। ऐसे में एक अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर, जहाँ मरीजों को जीवनदान देने का प्रयास किया जाता है, वहाँ एक मृत शरीर के साथ इस तरह का क्रूर बर्ताव कई सवाल खड़े करता है। यह न सिर्फ मृतक के परिजनों के लिए दर्दनाक है, बल्कि समाज में भी गलत संदेश देता है।
अस्पताल परिसर में शव को इस तरह लावारिस छोड़ देना, खासकर सीढ़ियों के नीचे, एक गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। यह घटना दर्शाती है कि अस्पताल में न केवल प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, बल्कि बुनियादी मानवीय मूल्यों को भी ताक पर रख दिया गया। आमतौर पर, मरीज की मौत के बाद शव को एक निश्चित प्रक्रिया के तहत मोर्चरी में रखा जाता है या परिजनों को सौंपा जाता है। इस मामले में, यह सभी नियम-कानून धड़ाम होते दिखे।
व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस घटना ने अस्पताल के प्रबंधन और कर्मचारियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आखिर किन परिस्थितियों में किसी शव के साथ ऐसा व्यवहार किया गया? क्या अस्पताल में शवों के प्रबंधन के लिए कोई स्पष्ट नीति या कर्मचारी नहीं थे? यदि थे, तो उनका पालन क्यों नहीं किया गया? यह घटना अस्पताल के अंदर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की पोल खोलती है।
प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को इस मामले की गहन जांच करनी चाहिए। यह पता लगाना आवश्यक है कि इस अमानवीय कृत्य के लिए कौन जिम्मेदार है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी भी मृत व्यक्ति के सम्मान को ठेस न पहुंचे और अस्पताल जैसे पवित्र स्थान पर मानवीय गरिमा बनी रहे। इस घटना ने समाज को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कहाँ जा रही है हमारी संवेदनाएँ।



